Tuesday, October 4, 2022

पितृ पक्ष कल से , कहां और किस तरह करें श्राद्ध , भूलकर भी अगले 15 दिन न करें ये काम

अंग्वाल न्यूज डेस्क
पितृ पक्ष कल से , कहां और किस तरह करें श्राद्ध , भूलकर भी अगले 15 दिन न करें ये काम

हरिद्वार ।  Pitru Paksha 2022 । हिंदू सनातन धर्म में पितृ पक्ष का एक विशेष महत्व है । ऐसी मान्यता है कि इस दौरान पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कार्य किए जाने चाहिएं । श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान जैसे कार्यों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है तथा कुंडली में मौजूद पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। श्राद्ध के दिन दान का खास महत्व है। इस बार पितृ पक्ष भादो मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानी कल 10 सितंबर से शुरू होकर आश्विन महीने की अमावस्या तिथि 25 सितंबर को खत्म होंगे । जातकों को चाहिए कि इस समयावधि में कुछ काम भूलकर भी न करें , ऐसा नहीं करने से आपके द्वारा श्राद्ध दिए जाने के बावजूद आपको अपने पितरों का आशिर्वाद नहीं मिलता ।

श्राद्ध परिवार में सुख शांति लाते हैं

शास्त्रों के मतानुसार , कदाचित देवकार्यो में शिथिलता क्षम्य है किन्तु पितृ पक्ष में श्राद्ध तर्पण कर अपने पितरो के प्रति श्रद्धा निवेदन करना अनिवार्य है। पितृगण प्रसन्न होकर अपना शुभ आशीर्वाद एवं जीवन मे शुभ फल प्रदान करते है । परिवार में सुख शांति प्रदान करते है । जिस प्रकार पिता का कमाया हुआ धन पुत्र को प्राप्त हो जाता है उसी प्रकार पुत्र द्वारा श्राद्ध पक्ष में दिया हुआ अन्न-जल पिता को प्राप्त हो जाता है। श्रद्धा भाव से पितृ पक्ष में किया गया श्राद्ध कर्म ही पुत्र को अपने पिता की सम्पत्ति का अधिकारी सिद्ध करता है।

नियमों का पालन आवश्यक है

जानकारों का कहना है कि इस समयावधि में कुछ नियमो का पालन करना श्रेष्ठ फल प्रदायक होता है । ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितर देव किसी न किसी रूप में अपने वंशजो को खोजते हुए घर के दरवाजे पर आ सकते है। इसीलिए पितृ पक्ष में दरवाजे पर आने वाले किसी भी जीव का निरादर नही करना चाहिए।

- पितृ पक्ष में भूल से भी कुत्ते, बिल्ली , गायो एवं किसी भी जानवर को मारना या सताना नही चाहिए । 

-  कौओं, पशु-पक्षियो को अन्न - जल देना उत्तम फल दायी होता है | इन्हें भोजन देने से पितृगण संतुष्ट होते है  । 

- जो व्यक्ति पितरो का श्राद्ध करता है ,उन्हें पितृ पक्ष में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए | खान पान में पूर्णतः सात्विकता बरतनी चाहिए , मांस-मछली, मदिरा इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए । 


- पितृ पक्ष की अवधि में चना, मसूर ,सरसों का साग , सत्तू ,जीरा ,मूली ,काला नमक ,लौकी ,खीरा एवं बांसी भोजन का त्याग करना चाहिए । जो धाम नहीं जा सकते वो ऐसा करें...

बता दें कि श्राद्ध कर्म में स्थान का विशेष महत्त्व है । शास्त्रो के अनुसार ,  गया , प्रयागराज , बद्रीनाथ इत्यादि  में श्राद्ध एवं पिंडदान करने से पितरो को मुक्ति मिलती है । हालांकि जो लोग इन स्थानों पर किसी कारण ये कार्य नहीं करवा पाते वे अपने घर के आँगन अथवा अपनी जमीन पर कही भी तर्पण कर सकते है । दूसरे की जमीन पर तर्पण करने से पितर तर्पण स्वीकार नहीं करते |

काले तिल का है महत्व

ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध एवं तर्पण क्रिया में काले तिल का बड़ा महत्त्व है । श्राद्ध करने वालों को पितृ कर्म में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए । इस दौरान लाल एवं सफ़ेद तिल का प्रयोग वर्जित होता है । 

- इतना ही नहीं पितृ पक्ष में भोजन करने वाले ब्राह्मण के लिए भी नियम है कि श्राद्ध का अन्न ग्रहण करने के बाद कुछ न खाये । इस दिन अपने घर में भी भोजन नहीं खाएं । जो ब्राह्मण नियम का पालन नहीं करता वह प्रेत योनि में जाता है |

- यदि पितरों की मृत्यु की तिथि पता है तो तिथि अनुसार ही पिंडदान करें , वरना सर्व पितृ अमावस्‍या या धर्म-शास्‍त्रों में बताई गई तिथियों के अनुसार पिंडदान करें ।  

- इस दौरान ब्राह्मणों, गरीबों को सामर्थ्‍य के अनुसार दान-दक्षिणा दें । हर दिन पंचबली निकालें , यानी कि गाय, कुत्‍ते, कौवे, देवताओं और चींटी के लिए भोजन निकालें ।  

- कभी भी शाम के समय श्राद्ध न करें , शाम के समय श्राद्ध कर्म करना अशुभ माना जाता है । यह कार्य सुबह या दोपहर के पहले चरण तक पूरा कर लें ।

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