Friday, November 16, 2018

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पौड़ी के ‘अरविंद’ बने लोगों के लिए संघर्ष की मिसाल, चाय बेचकर बने पीसीएस अधिकारी

अंग्वाल न्यूज डेस्क
पौड़ी के ‘अरविंद’ बने लोगों के लिए संघर्ष की मिसाल, चाय बेचकर बने पीसीएस अधिकारी

देहरादून। जीवन की मुश्किलों से सबक लेते हुए मंजिल को पाना और दूसरों के लिए एक मिसाल बन जाना, जीना इसी का नाम है। हम बात कर रहे हैं पौड़ी जिले के नैनीडाडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत बड़ेथ निवासी अरविंद सिंह नेगी की। इंटर में फेल होने के बाद अरविंद ने व्यापारी के दुकान में खाता-बही भी संभाली फिर अपने पिता की चाय की दुकान भी चलाई लेकिन अपने लक्ष्य से कभी पीछे नहीं हटा। इसी का नतीजा है कि वह आज उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपी-पीसीएस लोअर) की परीक्षा पास कर श्रम प्रवर्तन अधिकारी बन गया है। आइए जानते हैं उनके बारे में।

गौरतलब है कि पौड़ी जिले के नैनीडाडा ब्लॉक के बड़ेथ पंचायत के रहने वाले अरविंद सिंह नेगी ने साल 2003 में हाईस्कूल की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास की और 2005 में इंटरमीडिएट की परीक्षा दी लेकिन सफल नहीं हो पाए। अपनी असफलता से वे निराश नहीं हुए बल्कि नए सिरे से दोबारा तैयारी शुरू कर दी और प्रथम स्थान भी हासिल किया। इसके बाद तो उन्होंने मेहनत को ही जीवन का मूलमंत्र बना दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इस वजह से वे मेरठ जाकर पिता की छोटी-सी चाय की दुकान में हाथ बंटाने लगे।

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यहां बता दें कि दुकान पर चाय बेचते हुए अरविंद ने मेरठ से ही बीकॉम एवं एमकॉम की डिग्री भी हासिल कर ली। कुछ दिनों तक अरविंद ने व्यापारियों के हिसाब-किताब का काम भी संभाला लेकिन जल्द उन्हें अहसास हो गया कि इससे मंजिल नहीं पाई जा सकती और वे एक बार फिर से पिता की दुकान पर वापस आ गए। इसके साथ ही अरविंद पीसीएस (लोक सेवा आयोग) की तैयारी भी करने लगे। अपने काम के दौरान भी अरविंद अपनी मंजिल को पाने के लिए पूरी तरह से जुड़े रहे। गौर करने वाली बात है कि अरविंद ने साल 2013 में पहली बार पीसीएस की परीक्षा दी लेकिन सफलता नहीं मिली।

2015 में उन्होंने फिर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपी-पीसीएस लोअर) की परीक्षा दी। परीक्षा के परिणाम हाल ही में घोषित हुए हैं, जिसमें अरविंद का चयन श्रम प्रवर्तन अधिकारी के पद पर हुआ है। हालांकि, उन्हें अभी 2016 में दी गई पीसीएस (अपर) परीक्षा के परिणामों का इंतजार है जबकि, वर्ष 2017 पीसीएस का मेन एग्जाम देना भी बाकी है। 

 

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