Thursday, November 23, 2017

Breaking News

   मैदान पर विराट के आक्रामक रवैये पर राहुल द्रविड़ को सताई चिंता     ||   अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित नहीं करेगा चीन, प्रस्ताव पर रोक लगाने के संकेत     ||   दुनिया की सबसे लंबी सुरंग बनाकर चीन अब ब्रह्मपुुत्र नदी का पानी रोकने का बना रहा है प्लान     ||   पीएम मोदी को शीला दीक्षित ने दिया जवाब- हमने नहीं भुलाया पटेल का योगदान    ||   पटना पहुंचे मोहन भागवत, यज्ञ में भाग लेने जाएंगे आरा, नीतीश भी जाएंगे    ||   अखिलेश को आया चाचा शिवपाल का फोन, कहा- आप अध्यक्ष हैं आपको बधाई    ||   अमेरिका में सभी श्रेणियों में H-1B वीजा के लिए आवश्यक कार्रवाई बहाल    ||   रोहिंग्या पर किया वीडियो पोस्ट, म्यांमार की ब्यूटी क्वीन का ताज छिना    ||   अब गेस्ट टीचरों को लेकर CM केजरीवाल और LG में ठनी    ||   केरल में अमित शाह के बाद योगी की पदयात्रा, राजनीतिक हत्याओं पर लेफ्ट को घेरने की रणनीति    ||

तीन तलाक पर पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा बयान,अदालत के फैसले का सम्मान इसका मतलब यह नहीं कि हम शरियत नहीं मानते...

अंग्वाल संवाददाता
तीन तलाक पर पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा बयान,अदालत के फैसले का सम्मान इसका मतलब यह नहीं कि हम शरियत नहीं मानते...

भोपाल। पिछले महीने तीन तलाक पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सोमवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन केंद्र सरकार की उस दलील का विरोध करते हैं जिसमें अदालत के हस्तक्षेप के बगैर तलाक को अवैध करार देने की बात कही गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारूकी ने बोर्ड की मीटिंग के बाद कहा कि बोर्ड मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक देने अथवा तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा को उच्चतम न्यायलय की संविधान पीठ द्वारा असवैंधानिक करार देने के फैसले का सम्मान करता है। हालांकि उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अटार्नी जनरल के जरिए उच्चतम न्यायलय में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि अदालत के हस्तक्षेप के बगैर तलाक के सभी रूपों को अवैध करार दिया जाना चाहिए। हम इस बात का विरोध करते हैं। 

यह भी पढ़े- स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण के 125 वें साल पर पीएम मोदी छात्रों को करेंगे संबोधित, ममता स...

साथ ही फारूकी ने कहा, कि इस पर हम अपनी नराजगी व्यक्त करते हैं और इसे हम मुस्लिमों के पर्सनल लॉ पर हमला समझते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का यह व्यवहार भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त संरक्षण के विपरीत है। इस्लामिक शरिया इस्लाहे माशरा के तहत व्यापक पैमाने पर कम्युनिटी सुधार कार्यक्रम करने के तरीकों एवं प्रक्रिया पर सलाह देने के लिए रविवार को एक कमेटी का गठन करने का प्रस्ताव पास किया। नराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि हम अदालत का सम्मान करते है इसका मतलब यह नहीं कि हम शरीरयत को नहीं मानते हैं। फारूकी ने बताया कि तीन तलाक मुस्लिमों का मूलभूत अधिकार है। बोर्ड का मानना है कि शरिया के अनुसार तलाक-ए-बिद्दत पाप है, लेकिन मान्य है। लंबे समय से हमने इस प्रथा को रोकने के लिए कहम उठाये हैं और करीब दो दशक पहले मॉडल फॉर्म ऑफ निकाहनामा जारी किया है। 


यह भी पढ़े- रेयान स्कूल हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई, दो सीनियर अधिकारी गिरफ्तार साथ ही दो SHO सस्पेंड 

 

Todays Beets: