Friday, July 20, 2018

Breaking News

   जापान में फ़्लैश फ्लड से 200 लोगों की मौत     ||   देहरादून में जलभराव पर सरकार ने लिया संज्ञान अधिकारियों को दिए निर्देश     ||   भारत ने टॉस जीता फील्डिंग करने का फैसला     ||   उपेन्द्र राय मनी लाउंड्रिंग मामले में सीबीआई ने 2 अधिकारियों को गिरफ्तार किया     ||   नीतीश का गठबंधन को जवाब कहा गठबंधन सिर्फ बिहार में है बाहर नहीं     ||   जापान में बारिश का कहर जारी 100 से ज्यादा लोगों की मौत     ||   PM मोदी के नोएडा दौरे से पहले लगा भारी जाम, पढ़ें पूरी ट्रैफिक एडवाइजरी     ||    नीतीश ने दिए संकेत: केवल बिहार में है भाजपा और जदयू का गठबंधन, राष्ट्रीय स्तर पर हम साथ नहीं    ||   निर्भया मामले में तीनों दोषियों को होगी फांसी, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ठुकराई    ||   उत्तर भारत में धूल: चंडीगढ़ में सुबह 11 बजे अंधेरा छाया, 26 उड़ानें रद्द; दिल्ली में भी धूल कायम     ||

तीन तलाक पर पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा बयान,अदालत के फैसले का सम्मान इसका मतलब यह नहीं कि हम शरियत नहीं मानते...

अंग्वाल संवाददाता
तीन तलाक पर पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा बयान,अदालत के फैसले का सम्मान इसका मतलब यह नहीं कि हम शरियत नहीं मानते...

भोपाल। पिछले महीने तीन तलाक पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सोमवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन केंद्र सरकार की उस दलील का विरोध करते हैं जिसमें अदालत के हस्तक्षेप के बगैर तलाक को अवैध करार देने की बात कही गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारूकी ने बोर्ड की मीटिंग के बाद कहा कि बोर्ड मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक देने अथवा तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा को उच्चतम न्यायलय की संविधान पीठ द्वारा असवैंधानिक करार देने के फैसले का सम्मान करता है। हालांकि उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अटार्नी जनरल के जरिए उच्चतम न्यायलय में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि अदालत के हस्तक्षेप के बगैर तलाक के सभी रूपों को अवैध करार दिया जाना चाहिए। हम इस बात का विरोध करते हैं। 

यह भी पढ़े- स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण के 125 वें साल पर पीएम मोदी छात्रों को करेंगे संबोधित, ममता स...

साथ ही फारूकी ने कहा, कि इस पर हम अपनी नराजगी व्यक्त करते हैं और इसे हम मुस्लिमों के पर्सनल लॉ पर हमला समझते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का यह व्यवहार भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त संरक्षण के विपरीत है। इस्लामिक शरिया इस्लाहे माशरा के तहत व्यापक पैमाने पर कम्युनिटी सुधार कार्यक्रम करने के तरीकों एवं प्रक्रिया पर सलाह देने के लिए रविवार को एक कमेटी का गठन करने का प्रस्ताव पास किया। नराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि हम अदालत का सम्मान करते है इसका मतलब यह नहीं कि हम शरीरयत को नहीं मानते हैं। फारूकी ने बताया कि तीन तलाक मुस्लिमों का मूलभूत अधिकार है। बोर्ड का मानना है कि शरिया के अनुसार तलाक-ए-बिद्दत पाप है, लेकिन मान्य है। लंबे समय से हमने इस प्रथा को रोकने के लिए कहम उठाये हैं और करीब दो दशक पहले मॉडल फॉर्म ऑफ निकाहनामा जारी किया है। 


यह भी पढ़े- रेयान स्कूल हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई, दो सीनियर अधिकारी गिरफ्तार साथ ही दो SHO सस्पेंड 

 

Todays Beets: