Sunday, September 23, 2018

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ये हैं सुप्रीम कोर्ट के वो 4 जस्टिस , जिन्होंने देश के लोकतंत्र को खतरे में बताया, CJI पर उठाए सवाल 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
ये हैं सुप्रीम कोर्ट के वो 4 जस्टिस , जिन्होंने देश के लोकतंत्र को खतरे में बताया, CJI पर उठाए सवाल 

नई दिल्ली । देश की आजादी के बाद शुक्रवार को यह पहला मौका होगा, जब देश का तीसरा स्तंभ न्यायपालिका अपनी बात कहने के लिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया के सामने आया हो। कुछ ऐसा ही हुआ शुक्रवार सुबह जब सुप्रीम कोर्ट के चार पदस्थ वरिष्ठ जजों ने एक पत्रकार वार्ता आयोजित करते हुए न्यायपालिका में जारी भ्रष्टाचार पर अपनी बात कही। इन सभी जजों ने न्यायपालिका की निष्ठा पर सवाल उठने की बात कही। पत्रकार वार्ता आयोजित करने वालों में सुप्रीम कोर्ट के नंबर -2 जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर, जस्टिस रंगन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ रहे। यह पत्रकार वार्ता आयोजित भी हुई जस्टिस चेलमेश्वर के निवास पर। हालांकि इन चारों जजों की पत्रकार वार्ता के बाद जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून मंत्री के साथ बैठक शुरू कर दी, वहीं चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने एटॉर्नी जनरल के साथ मंथन बैठक शुरू कर दी। बहरहाल क्या आप जानते हैं कौन हैं ये चार सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस...अगर नहीं तो चलिए हम बताते हैं इनके बारे में ... 

जस्ती चेलमेश्वर

जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर का जन्म आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में हुआ। भौतिकी विज्ञान में ग्रेजुएशन करने के बाद 1976 में आंध्र युनिवर्सिटी से उन्होंने कानून की डिग्री हासिल की, हालांकि उन्हें वकालत विरासत में मिली थी। वह केरल और गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रहे हैं। अक्टूबर, 2011 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने। जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर अपने उस फैसले के लिए भी काफी सुर्खियों में रहे, जिसमें उन्होंने जस्टिस रोहिंगटन फली नरीमन के साथ मिलकर उस विवादित कानून को खारिज किया था, जिसमें पुलिस के पास किसी के खिलाफ आपत्तिजनक मेल करने या इलेक्ट्रॉनिक मैसेज करने के आरोप में गिरफ्तार करने का अधिकार था। इस फैसले की देश में काफी तारीफ हुई थी। चेलमेश्वर ने जजों की नियुक्ति को लेकर नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइन्ट्मन्ट्स कमीशन (NJAC) का समर्थन किया, साथ ही वह पहले से चली आ रही कोलेजियम व्यवस्था की आलोचना कर चुके हैं। 

जस्टिस रंजन गोगोई

मूल रूप से असम के रहने वाले जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जजों में शामिल हैं। वरिष्ठता के आधार पर अक्टूबर, 2018 में वह देश की सबसे बड़ी अदालत में जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायर होने के बाद मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं। ऐसा हुआ तो वह भारत के पूर्वोत्तर राज्य से इस शीर्ष पद पर काबिज होने वाले पहले जस्टिस होंगे। गुवाहाटी हाईकोर्ट से करियर की शुरुआत करने वाले जस्जिस गोगोई फरवरी, 2011 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। अप्रैल, 2012 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने. उनके पिता केशब चंद्र गोगोई असम के मुख्यमंत्री रहे हैं। 


जस्टिस मदन भीमराव लोकुर

जस्टिस मदन भीमराव लोकुर ने अपनी शिक्षा दिल्ली से ही ली। डीयू से इतिहास (ऑनर्स) में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने दिल्ली से ही कानून की डिग्री हासिल की। 1977 में उन्होंने वकालत शुरू की और उसके बाद 2010 में वह फरवरी से मई तक दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे। इसके बाद अगले महीने जून में वह गुवाहाटी हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश पद पर चुन लिए गए। इसके बाद वह आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के भी मुख्य न्यायधीश रहे। 

जस्टिस कुरियन जोसेफ

इसी क्रम में बात करें तो 1979 में अपनी वकालत करियर की शुरुआत करने वाले जस्टिस कुरियन जोसेफ वर्ष 2000 में केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चुने गए। इसके बाद फरवरी, 2010 में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। 8 मार्च, 2013 को वह सुप्रीम कोर्ट में जज बने। 

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