Wednesday, April 24, 2019

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LIVE - दिल्ली का बॉस कौन ? सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच भी नहीं तय कर पाई, कुछ मुद्दों पर सुनाया फैसला

अंग्वाल न्यूज डेस्क
LIVE - दिल्ली का बॉस कौन ? सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच भी नहीं तय कर पाई, कुछ मुद्दों पर सुनाया फैसला

नई दिल्ली। दिल्ली में अधिकारों की लड़ाई के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने अपना फैसला सुना दिया है। जस्टिस सीकरी और जस्टिस भूषण ने दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल के मामले में जहां 6 बिंदुओं पर अपना फैसला सुनाया, वहीं केंद्रीय कैडर के अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के मुद्दे पर दोनों जजों में मतभेद था, इसलिए अब इस मुद्दे पर तीन जजों की बड़ी बेंच सुनवाई करेगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ किया कि एंटी करप्शन ब्यूरो पर अधिकार केंद्र सरकार को दिया है। इसके साथ ही कमिशन ऑफ इंक्वायरी का अधिकार भी केंद्र सरकार को दिया गया है। इससे इतर रेवन्यू यानी दिल्ली में जमीनों को खरीदने बेचने की दरें तय करना और अधिग्रहण पर दर तय करने का अधिकार दिल्ली सरकार को दिया गया है। इसी क्रम में बिजली की दरें तय करने का अधिकार भी दिल्ली सरकार को दिया गया है।

हाई कोर्ट ने उपराज्यपाल को बताया था बॉस

बता दें कि इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली का बॉस उपराज्यपाल को बताया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने 4 अगस्त 2016 को इस मसले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं और दिल्ली सरकार उपराज्यपाल की मर्जी के बिना कानून नहीं बना सकती। उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं । वह अपने विवेक के आधार पर फैसला ले सकते हैं, साथ ही दिल्ली सरकार को किसी भी तरह का नोटिफिकेशन जारी करने से पहले एलजी की अनुमति लेनी ही होगी।

फैसले को दी थी चुनौती

दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले को लेकर दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 5 जजों की संविधान पीठ ने 6 दिसंबर, 2017 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

जानिए क्या कहा सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने

- सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सीकरी ने कहा कि राजधानी में सभी एक्जीक्यूटिव अधिकार दिल्ली सरकार के पास ही रहेंगे।


- वहीं जस्टिस अशोक भूषण ने भी कुछ मुद्दों पर जस्टिस सीकरी के साथ सहमति जताई, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग के मुद्दे पर दोनों जजों में मतभेद ही रहा, इसलिए इस मुद्दे को बड़ी बेंच के पास भेज दिया गया है।

- इसी क्रम में दिल्ली में जमीन, पुलिस और कानून व्यवस्था से जुड़े सभी अधिकार केंद्र सरकार यानी उपराज्यपाल के पास रहेंगे. हालांकि, इस फैसले पर दोनों जज आपस में सहमति नहीं बना पाए।

- किसी अफसर की नियुक्ति या फिर ट्रांसफर को लेकर उपराज्यपाल राज्य सरकार के मंत्रिमंडल की सलाह पर फैसला ले सकते हैं । उन्होंने कहा कि IPS की ट्रांसफर-पोस्टिंग का हक उपराज्यपाल, और DANICS-DANIPS का फैसला मुख्यमंत्री के पास रहेगा। 

-अभी ग्रेड 1 और 2 के अफसरों के तबादलों और नियुक्ति का अधिकार केंद्र के पास होगा, जबकि ग्रेड 3 और 4 वालों पर दिल्ली सरकार फैसला ले सकेगी।

-उन्होंने सुझाव दिया कि DASS और DANICS के अधिकारियों के मुद्दे पर एक कमेटी का गठन किया जा सकता है।

- वहीं अब दिल्ली सरकार राजधानी में जमीन के सर्किल रेट तय कर सकती है।

- जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि दानिक्स का अधिकार सरकार के पास रहेगा, लेकिन एलजी की सहमति भी जरूरी है। किसी विवाद की स्थिति में दोनों पक्ष राष्ट्रपति के पास जाएंगे। 

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