Friday, July 19, 2019

होली इस बार धरती पर लाएगी सुख समृद्धि , जानें पांच दिन चलने वाले इस विशेष योग के बारे में

अंग्वाल न्यूज डेस्क
होली इस बार धरती पर लाएगी सुख समृद्धि , जानें पांच दिन चलने वाले इस विशेष योग के बारे में

नई दिल्ली । इस बार की होली कुछ खास है। रविवार को आमलकी एकादशी के साथ ही पांच दिन चलने वाले विशेष योग अब शुरू हो गया है। असल में सूर्य के मीन राशि में आने के बाद इन पांच योगों का होली पर आना अति शुभ कहा जाता है। जानकारों के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि इन योगों में दौरान होली का त्योहार आने से धरती पर सुख-समृद्धि बढ़ती है। इसी क्रम में रविवार को हजारों श्रद्धालुओं ने आमलकी एकादशी का व्रत रखकर भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा की। पुष्य नक्षत्र में श्रीवत्स योग से इन प्रमुख योगों का शुभारंभ हुआ है। पांच दिनों तक सौम्य, कालदंड, स्थिर और मातंग योग पड़ रह हैं।  इस बात का ध्यान रखें कि 20 मार्च की सुबह 10:45 बजे से रात 8:58 बजे तक भद्रा काल रहेगा। इस समय शुभ कार्य वर्जित हैं।

असल में रंगों का त्योहार होली इस बार चैत कृष्ण प्रतिपदा गुरुवार 21 मार्च को मनेगा। 20 मार्च को होलिका दहन होगा। होलिका दहन पर इस बार दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। इन संयोगों के बनने से कई अनिष्ट दूर होंगे। लगभग सात वर्ष के बाद देवगुरु बृहस्पति के उच्च प्रभाव में गुरुवार को होली मनेगी। इससे मान-सम्मान व पारिवारिक सुख की प्राप्ति होगी।

जानकारों के अनुसार , इस बार होली के रंग मातंग योग में खेले जाएंगे, जब चंद्रमा कन्या राशि में प्रविष्ट हो जाएंगे। पांच योगों का शुभारंभ पुष्य नक्षत्र से हुआ, जबकि पांच दिनों में आश्लेषा, मघा, पूफा और उफा नक्षत्र लगातार चार दिन पड़ेंगे। इन नक्षत्रों में सुमधुर योग आने से होलाष्टकों कर प्रभाव कम हो जाता है। मान्यता है कि होलाष्टक के आठ तंत्र-मंत्र के लिए बने हुए हैं। इन सिद्ध योगों के कारण बुरे ग्रहों का प्रभाव धरती पर नहीं पड़ता। पांच दिन बाद चैत्र कृष्ण पक्ष का शुभारंभ हस्त नक्षत्र और अमृत योग में होगा। इस प्रकार शुभ योगों का आगमन लगातार चलता रहेगा।


इस बार उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में होली मनेगी। यह नक्षत्र सूर्य का है। सूर्य आत्मसम्मान, उन्नति, प्रकाश आदि का कारक है। इससे वर्षभर सूर्य की कृपा मिलेगी। जब सभी ग्रह सात स्थानों पर होते हैं, वीणा योग का संयोग बनता है। ऐसी स्थिति से गायन-वादन व नृत्य में निपुणता आती है।

होलिका दहन इस बार पूर्वा फाल्गुन नक्षत्र में है। यह शुक्र का नक्षत्र है जो जीवन में उत्सव, हर्ष, आमोद-प्रमोद, ऐश्वर्य का प्रतीक है। होलिका दहन में जौ और गेहूं के पौधे डालते हैं। फिर शरीर में उबटन लगाकर उसके अंश भी डालते हैं। ऐसा करने से जीवन में आरोग्यता और सुख समृद्धि आती है।

 

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