Friday, December 14, 2018

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फिल्म रिव्यू : संजू - रणबीर का दमदार अभिनय जो लंबे समय तक याद रहेगा

अंग्वाल संवाददाता
फिल्म रिव्यू : संजू - रणबीर का दमदार अभिनय जो लंबे समय तक याद रहेगा

नई दिल्ली। अभिनेता संजय दत्त के जीवन पर बनी फिल्म संजू का इंतजार न केवल उनके चाहने वाले बल्कि हर तरह के लोग बेसब्री से कर रहे थे। ऐसे में राज कुमार हिरानी द्वारा निर्मित यह फिल्म शुक्रवार को बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई। इस फिल्म को शो के पहले दिन ही दर्शकों का बेहद प्यार मिला है। पूर्व में इस फिल्म में पहले रणबीर कपूर द्वारा संजय दत्त का किरदार निभाने को लेकर काफी आलोचना की जा रही थी पर रणबीर कपूर ने अपने अभिनय से इस फिल्म में जान डाल दी है। यहां अगर हम इस फिल्म की सफलता का श्रेय रणबीर कपूर के अभिनय को दें तो ये जरा भी गलत नहीं होगा।

क्या है कहानी

फिल्म की कहानी उस खबर के साथ शुरू होती है जब संजय दत्त को 5 साल की जेल की सजा सुनाई जाती है। अपनी जिंदगी के ऊपर किताब लिखने के लिए वे मशहूर राइटर विनी (अनुष्का शर्मा) से मिलते हैं और अपनी कहानी बताना शुरू करते हैं।कहानी सुनील दत्त (परेश रावल) और नरगिस दत्त (मनीषा कोइराला) के घर में 21 साल के संजू (रणबीर कपूर) से शुरू होती है, जो रॅाकी की शूटिंग कर रहा होता है। फिल्म संजू में अभिनेता संजय दत्त के बचपन से लेकर जवानी तक के सभी पहलुओं को दर्शाया गया है। बचपन में बोर्डिंग स्कूल भेजा जाना, ड्रग्स की लत लगना, माता-पिता से कई बातें छुपाना, नरगिस की तबीयत का खराब हो जाना, दोस्त कमलेश (विक्की कौशल) के साथ मुलाकात, फिल्म रॉकी से डेब्यू करना और उसके बाद कई फिल्मों में काम ना मिलना, रिहैब सेंटर में जाना, मुंबई बम धमाकों के साथ नाम जोड़ा जाना, कई बार जेल जाना। संजय दत्त के जीवन से जुड़े सभी उतार-चढ़ाव को इस फिल्म में बखूबी दिखाया गया है। संजय के जीवन के बारे में अगर आप ठीक तरह से जानना चाहते हैं तो अपको यह फिल्म जरुर देखनी चाहिए।

क्यों देखे फिल्म


वैसे तो संजय दत्त की लाइफ की ज्यादातर बातें सुर्खियों में रह चुकी हैं, जिसके बारे में हर कोई जानता है। बावजूद इसके अगर आप संजय के जीवन से जुड़ी कुछ अनकही बातों को भी करीब से जानना चाहते हैं तो आपको फिल्म जरुर देखनी चाहिए। फिल्म का डायरेक्शन शानदार है। कई बार ऐसे भावुक पल आते हैं जिस समय थिएटर के भीतर बहुत से लोगों की आंखें नम पाई गईं। खासतौर से इंटरवल के ठीक पहले का समय, फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर, VFX, कास्टिंग कमाल की है।

फिल्म की कमजोर कड़ी

फिल्म की छोटी-मोटी गलतियों को नजरअंदाज किया जाए तो यह फिल्म हर लिहाज से अच्छी है, पर फिल्म की लेंथ थोड़ी कम है, जिसे बढ़ाया जा सकता था। फिल्म की लेंथ ही इसकी कमजोर कड़ी है।

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