Friday, December 14, 2018

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90 के दशक के वे कार्टून्स जो आज भी हैं लोगों दिलों में जिंदा

अंग्वाल न्यूज डेस्क
90 के दशक के वे कार्टून्स जो आज भी हैं लोगों दिलों में जिंदा

जब हम मंनोरजन की बात करते हैं तो दिमाग में अलग-अलग फिल्मों और टी.वी के छोटे परदों के शो के खयाल आने लगते हैं। पर आज हम बात कर रहें हैं 90 के दशक के उन कार्टून्स की जिनकी छाप आज भी बच्चों के दिमाग पर वैसी ही ताजा हैं। उस समय के बच्चे अब या तो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं या कॉलेजो से निकल कर रोजगार के क्षेत्र मे प्रवेश कर चुके हैं , पर आज भी अगर ये कार्टून टीवी पर आ जाए तो उन्हें उनके बचपन के दिनों में वापस ले जाते हैं। यह कार्टून थे ही ऐसे की अभी तक लोगों के दिमाग से इनका असर नहीं गया।

इन कार्टून्स ने आज तक जीता हुआ है लोगों का दिल  

पोपॉय - इस कार्टून मे पोपॉय के अंदर पालक खाते ही ताकत आ जाती थी , यही वो कार्टून है जिसने उस समय बच्चों को पालक खाना सीखाया था । उसके बाद वो खुद को भी पोपॉय जैसा ताकतवर समझने लगते थे । कई लोग आज भी इसे देखना नहीं भूलते ।

'दि पावरपफ गर्ल्स' - यह कार्टून तीन बहनों पर आधारित था जो मिलकर दुनिया को बचाने का काम करती थीं। ये तीनों एक दूसरे से बहुत प्यार करती थीं। इनके इस अंदाज ने सबका बहुत दिल जीता।

 

'टॉम एंड जेरी' - यह एक कभी न खत्म होने वाला चूहे-बिल्ली का खेल था , जिसे बच्चे और बड़े सभी देखना पंसद करते थे । यह कार्टून सबसे ज्यादा देखा जाने वाला कार्टून था।

 

'स्कूबी डू' - इस कार्टून में मिस्ट्री के कांसेप्ट को प्राथमिकता दी गई थी। इस लिए इस कार्टून को इतना अधिक पंसद किया गया था। जिस तरह की मिस्ट्री को टीवी शो मे एक दो घंटे में भी खत्म नहीं किया जाता था वही इस कार्टून मे मिस्ट्री 25 मिनट में हल हो जाती थी। 

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'करेज द कवर्डली डॉग' - यह एक डरावनी कॉमेडी पर आधारित कार्टून था । इसकी यही खासियत इसे दूसरे कार्टून्स से अलग करती थी। इस में घर का डॉग घर के लोगों को खतरनाक शक्तियों से बचाता था और अंत में उसका मालिक उसे नसमझ कहीं का कह कर चल देता था । कार्टून के इस अलग पन ने दर्शकों को को इसका दीवाना बना दिया था।

 


'अलादिन' - उड़ते कालिन और एक जिन्न के इस कार्टून ने बच्चों को खुद से इस कदर बांधा की बच्चे असल दुनिया में भी जिन्नो और कालिनों के उड़ने की कहानी को सच मानने लगे। अपने इसी अलग अंदाज की वजह से इस कार्टून के इतना पंसद किया गया । 

 

'मोगली' - मोगली एक ऐसा कार्टून था जिसे घर के सभी लोग एक साथ मिल के देखा करते थे । इस कार्टून ने लोगो को एक साथ बांधा था । बड़े और बच्चे सभी इसे पसंद करते थे । इस कार्टून के गाने 'जंगल-जंगल बात चली पता चला है' को बच्चों ने बहुत पंसद किया।

'टीमोन और पुंम्बा' - इस कार्टून में हंसी मजाक, टीमोन और पुंम्बा की गहरी दोस्ती के साथ-साथ एक और चीज ने खास बनाया था। वो था इस कार्टून का गाना 'हकुना मटाटा' उस समय का शायद ही कोई ऐसा बच्चा होगा जिसके जुबान पर ये गाना न हो । ये गाना इस कार्टून की जान थी। 

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'रिसेस' - यह उस समय का वो कार्टून था जिसमे बच्चों के स्कूल की जिन्दंगी और उस में उनकी सिमटी हुई दुनिया को दिखाया जाता था। स्कूल की ये मौंज मस्ती बच्चों को बड़ा भाती थी।

'डेक्सटर द लेबोरेट्री' - इस कार्टून में एक छोटा बच्चा अपने घर के बेसमेंट की लेबोरेट्री में एक्सपेरीमेंट करता था, जिसे हमेशा उसकी बड़ी बहन बिगाड़ देती थी। इसे फिर सुधारा जाता था । भाई-बहन की इस जोड़ी ने सबका बहुत दिल जीता।

 

 

 

 

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