Wednesday, January 23, 2019

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एशियन गेम्स में देश को मेडल दिलाने वाला दिल्ली का खिलाड़ी वापस पहुंचा अपनी चाय की दुकान पर, गरीबी में जीने को मजबूर 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
एशियन गेम्स में देश को मेडल दिलाने वाला दिल्ली का खिलाड़ी वापस पहुंचा अपनी चाय की दुकान पर, गरीबी में जीने को मजबूर 

नई दिल्ली। इंडोनेशिया में हाल ही में संपन्न हुए एशियन गेम्स में भारत ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। मेडल जीतने वाले सभी खिलाड़ियों के अपने राज्यों में पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया और प्रदेश सरकार ने भी उनपर इनामों की बरसात कर दी है लेकिन सेपकटकरा में देश को कांस्य पदक दिलाने वाली टीम का हिस्सा रहे दिल्ली के खिलाड़ी हरीश कुमार जब वापस लौटे तो उन्हें हवाई अड्डे पर लेने के लिए राजनीतिक पार्टी का कोई भी नहीं व्यक्ति नहीं पहुंचा। यहां तक की उसे वापस आने के लिए कोई गाड़ी का कोई इंतजाम नहीं था। 

गौरतलब है कि हरीश कुमार मजनू का टीला इलाके में रहने वाले एक बेहद ही मामूली परिवार से ताल्लुक रखते हैं और चाय की दुकान चलाकर अपना गुजारा करते हैं। हरीश कुमार के लिए दिल्ली सरकार की ओर किसी भी तरह के इनाम की कोई घोषणा नहीं की गई है। जकार्ता से लौटने के बाद उन्हें हवाई अड्डे पर लेने के लिए कोई भी नहीं पहुंचा। घर पर पहुंचने के बाद थोड़ी देर तक तो जश्न मनाया गया।

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यहां बता दें कि शाम होते-होते नजारा बदल गया। हरीश रोज की तरह अपनी उस चाय की दुकान पर ग्राहकों की जी-हुजूरी करने में जुट गया क्योंकि इसीसे उनके परिवार का गुजारा होता है। आपको बता दें कि हरीश ने अपनी टीम (हरीश, संदीप, धीरज, ललित) के साथ इंडोनेशिया से मेडल जीता था।


क्या होता है सेपक टकरा ?

सेपक टकरा, मलय और थाई भाषा के दो शब्द हैं। सेपक, मलय का शब्द है, जिसका अर्थ किक लगाना है। टकरा का मतलब हल्की गेंद है। यह भारत के उत्तरपूर्वी राज्य में लोकप्रिय है। यह खेल वॉलीबॉल, फुटबॉल और जिम्नास्टिक का मिश्रण है। इस खेल को इंडोर हाल में 20 गुणा 44 के आकार की जगह में सिंथेटिक फाइबर की गेंद से इस खेल को खेला जाता है। इस खेल में सिर्फ पैर, घुटने और सीने का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें हाथों का उपयोग बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता है। 

 

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