Thursday, September 21, 2017

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समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया तो बिल्डर प्रतिदिन 1 लाख रुपये जुर्माना दे - बांबे हाईकोर्ट

अंग्वाल संवाददाता
समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया तो बिल्डर प्रतिदिन 1 लाख रुपये जुर्माना दे - बांबे हाईकोर्ट

मुंबई । समय पर निवेशकों को फ्लैट नहीं सौंपने के मामले में बांबे हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुंबई के एक बड़े बिल्डर को निर्देश दिए हैं कि अगर 30 सितंबर की निर्धारित तारीख पर अपनी 20 मंजिला इमारत का निर्माण कराने से चूका और समय पर फ्लैट मालिकों को उनके फ्लैट नहीं सौंप पाया तो उसे प्रतिदिन 1 लाख रुपये का जुर्माना चुकाना होगा। अभी बिल्डर कंदिवली में एक 20 मंजिला टॉवर का निर्माण करवा रहा है, जिसमें 85 फ्लैट बन रहे हैं। इस बिल्डर ने 2012 में लोगों को अपने फ्लैट पर कब्जा देने का वायदा किया था लेकिन ऐसा नहीं कर पाने पर पिछले साल एक फ्लैट मालिक विक्रम हरलाका ने कोर्ट में बिल्डर के खिलाफ केस दर्ज करवाया था।

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बता दें कि मुंबई के कंदिवली में आरएनए यूनिवर्सल एक 20 मंजिला इमारत RNA GRAND का निर्माण करवा रही है। 2010 में इसका निर्माण शुरू किया गया था, जिसके तहत 3 बीएचके के दो टॉवर बनाए जाने थे। इन फ्लैटों की कीमत 1.75 करोड़ रुपये रखी गई थी। यहां फ्लैट खरीदने वाले निवेशकों को 2012 में फ्लैट दिए जाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन बिल्डर समय पर लोगों को फ्लैट का कब्जा नहीं दे पाया, क्योंकिन अभी निर्माण कार्य पूरा ही नहीं हो पाया था। 

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यह क्रम अभी भी बदस्तूर जारी है, हालांकि इसके खिलाफ एक निवेशक विक्रम हरलाका ने 2016 में कोर्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया। विक्रम का कहना है कि पहले 2012 में फ्लैट का कब्जा दिए जाने की बात कही गई, फिर लंबे समय तक निर्माण कार्य बंद हो गया। बिल्डर ने बाद में 2017 की जनवरी में कब्जा देने का वायदा किया, लेकिन नहीं दे पाया, फिर जून में कब्जा देने की बात कही, लेकिन अभी भी स्थित यथावत है। 


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वहीं विक्रम द्वारा दायर मुकदमे पर सुनवाई करते हुए बांबे हाईकोर्ट के जज केआर श्रीराम ने इस मामले में बिल्डर को फटकार लगाते हुए उन्हें 30 सितंबर तक कब्जा देने का आदेश दिया है। ऐसा नहीं कर पाने पर उन्होंने बिल्डर को कहा है कि वह 1 से 10 अक्टूबर के बीच 10 लाख रुपये बतौर जुर्माना 10 दिन का जमा करा दें।  अगर बिल्डर इस दौरान भी कब्जा देने में विफल रहा तो वह 11 से 20 अक्टूबर के बीच फिर से 10 लाख रुपये जमा कराए। 

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कोर्ट ने कहा कि यह राशि एक राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा करवाई जाए और इस राशि का इस्तेमाल यहां रहने वाले लोग एक सोसायटी बनाकर काम में लाएं। हालांकि इन आदेशों के बाद आरएनए यूनिवर्सल के वकील चिराग बलसारा ने अदालत को आश्वासन दिया कि यह परियोजना अदालत द्वारा जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक पूरा हो जाएगा। 

इस मामले में बिल्डर ग्रुप के मालिक अनुभव अग्रवाल ने कहा कि हमने ही कोर्ट से इस तरह की गारंटी के लिए कहते हुए एक और समय सीमा विस्तार की मांग की थी। हमने खुद ही आगे देरी होने पर प्रतिदिन 1 लाख रुपये का भुगतान करने की पेशकश की थी। हालांकि अब इसकी नौबत नहीं आएगी, मुझे विश्वास है कि हम परियोजना पूरी कर लेंगे।

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