Tuesday, October 20, 2020

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''हिन्दुस्तानी जलपरी'' आरती साहा पर GOOGLE का डूडल , 12 साल में ओलंपिक में खेला, 19 में इंग्लिश चैनल पार किया

अंग्वाल न्यूज डेस्क

नई दिल्ली । वर्ष 1959 में मात्र 19 साल की उम्र में इंग्लिश चैनल को तैरकर पार करने वाली भारतीय महिला तैराक आरती साहा को आज पूरी दुनिया याद कर रही है । इसका एक बड़ा कारण यह है कि सर्च इंजन गूगल (Google) ने गुरुवार को दिग्गज भारतीय महिला तैराक पर अपना डूडल बनाया है। इतना ही नहीं खास बात यह है कि आज यानी 24 सितंबर 2020 को उनकी 80वीं जयंती है। वर्ष 1959 में तैरकर इंग्लिश चैनल पार करने वालीं पहली एशियाई महिला बनी थीं, जिसके बाद उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री के सम्मान से नवाजा था । 

'हिंदुस्तानी जलपरी' के नाम से विख्यात रहीं आरती साहा को याद करते हुए गूगल ने डूडल के जरिए उन्हें याद किया। गूगल के इस डूडल में इंग्लिश चैनल में आरती का ग्राफिक बनाया गया है जो तैरते हुए नजर आ रही हैं।

आरती साहा का सफरनामा

बता दें कि कोलकाता , पश्चिम बंगाल की मूल निवासी आरती साहा का जन्म 24 सितंबर, 1940 को कोलकाता (तब ब्रिटिश भारत) में हुआ था। उन्होंने हुगली नदी के किनारे तैरना सीखा। बाद में उन्होंने भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रतिस्पर्धी तैराकों में से एक सचिन नाग की निगरानी में प्रशिक्षण लिया। आरती ने 4 साल की उम्र से ही तैराकी शुरु कर दी थी। उनका पूरा नाम आरती साहा 'गुप्ता' था। 

- पांच साल की उम्र में साहा ने अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था। 11 साल की उम्र तक उन्होंने कई तैराकी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।

- 1949 में आरती ने अखिल भारतीय रिकार्ड सहित राज्यस्तरीय तैराकी प्रतियोगिताओं को जीता। उन्होंने 1952 में हेलसिंकी ओलंपिक में भी भाग लिया। 

- असल में साहा पर लोगों की नजर तब पड़ी जब उन्होंने 1949 में राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। 1951 में उन्होंने डॉली नज़ीर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ अपने करियर का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया था। साहा और नजीर को भारत की ओर से 1952 ओलंपिक में जाने का मौका दिया गया।

- लेकिन दुनिया में उन्होंने अपना लोहा वर्ष 1959 में मनवाया । आरती ने अपने दूसरे प्रयास में इंग्लिश चैनल पार करने के बाद भारतीय ध्वज फहराया था।  

-उन्होंने 16 घंटे और 20 मिनट में 67.5 किमी की दूरी तय की थी। उन्हें साल 1960 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया था । 

 - भारतीय पुरुष तैराक मिहिर सेन से प्रेरित होकर उन्होंने इंग्लिश चैनल पार करने की कोशिश की थी । साथ ही ऐसी भी खबरें रही है कि इंग्लिश चैनल पार करने की प्रेरणा आरती को बांग्लादेशी तैराक ब्रोजन दास से मिली थी जो 1952 में इंग्लिश चैनल पार करने वाले पहले एशियाई शख्स बने थे। 

- ब्रोजन दास ने ही 1953 में होने वाली बटलिन इंटर्नेशनल क्रॉस चैनल स्विमिंग रेस के लिए साहा का नाम आगे किया था। 


- इंग्लैंड जाने के लिए आरती साहा के पास पैसों की तंगी थी। तब जवाहर लाल नेहरु उनकी मदद के लिए आगे आए थे।

- उस समय वह इस सम्मान को पाने वालीं पहली भारतीय महिला खिलाड़ी रहीं। 

असल में इंग्लिश चैनल को तैरकर पार करना एक ऐसा कारनामा रहा है , जिसे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के समान माना जाता है । आरती साहा ने केप ग्रिस नेज, फ्रांस से सैंडगेट, इंग्लैंड तक 42 मील की दूरी तय की थी । 

हालांकि इससे पहले भी वह अपना नाम कर चुकी थीं । आरती साहा ने अपना पहला तैराकी गोल्ड मेडल पांच साल की उम्र में जीता था ।  11 साल की उम्र में साहा फिनलैंड की हेलसिंकी में 1952 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में नए स्वतंत्र भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली सबसे कम उम्र की सदस्य बनी । इसके बाद 19 साल की कम उम्र में उन्होंने इंग्लिश चैनल को पार करके दुनिया को हैरानी में डाल दिया । 

 

पीलिया के कारण हुई मौत

दुनिया में हिन्दुस्तानी जलपरी के नाम से विख्यात आरती साहा वर्ष 1994 में पीलिया के चलते बीमारी हुई और उसी वर्ष 23 अगस्त को उनकी इस बीमारी के चलते मौत हो गई । 

विशेष स्मृति

वर्ष 1998 में भारतीय डाक विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल करने वाली भारतीय महिलाओं की स्मृति में जारी डाक टिकटों के समूह में आरती शाहा पर भी एक टिकट जारी किया गया था।

 

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