Thursday, June 30, 2022

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अब गांधी ने भी ठुकराई विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी , आखिर क्यों विपक्ष के चौथे शख्स ने किया इनकार

अंग्वाल न्यूज डेस्क
अब गांधी ने भी ठुकराई विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी , आखिर क्यों विपक्ष के चौथे शख्स ने किया इनकार

नई दिल्ली । देश में राष्ट्रपति चुनावों को लेकर जहां सत्तारूढ़ दल अपने लिए नए उम्मीदवार पर अंतिम मुहर लगाने की तैयारियों में जुटा है , वहीं विपक्ष की ओर से अभी तक उम्मीदवार ही तय नहीं हो पा रहा है । इसी क्रम में अब महात्मा गांधी के पौत्र  और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी ने भी विपक्ष के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है , जिसमें उन्हें विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के लिए कहा गया था । उन्होंने विपक्ष के प्रस्ताव को मानने से इनकार करते हुए कहा - मेरे नाम पर विचार करने के लिए विपक्षी नेताओं को धन्यवाद। विपक्ष को राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए राष्ट्रीय आम सहमति बनानी चाहिए। कई और भी नेता होंगे जो इसे मुझसे बेहतर करेंगे। इस सबसे इतर , अब खबर आ रही है कि विपक्ष लालू - मुलायम - यशवंत सिन्हा जैसे नेताओं के  नाम पर भी विचार कर रहा है ।  

गोपाल कृष्ण गांधी थे चौथे प्रस्तावित उम्मीदवार 

असल में इस बार के राष्ट्रपति चुनावों का ऐलान हो चुका है , जिसके बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दलों ने अपनी अपनी सियासी चालों को अंजाम देना शुरू कर दिया है । कुछ सियासी दलों ने एक दूसरे को समर्थन देने का ऐलान करना भी शुरू कर दिया है । विपक्ष को एकजुट करने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी काफी कोशिशें कर रहीं हैं। 15 जून को ही उन्होंने 22 विपक्षी दलों की एक बैठक बुलाई थी। इसमें 17 दलों के नेता शामिल हुए। दिल्ली और पंजाब की सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी, तेलंगाना की टीआरएस, ओडिशा की बीजेडी, आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियों ने खुद को इस बैठक से अलग रखा। 

इन चार नेताओं को विपक्ष का प्रस्ताव

बता दें कि रोचक हो चुके राष्ट्रपति चुनाव में अभी तक विपक्ष की ओर से एनसीपी प्रमुख शरद पवार, नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के बाद अब महात्मा गांधी के पौत्र  और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी को उम्मीदवार बनाया गया था । हालांकि एक एक करके सबने विपक्ष का उम्मीदवार बनने से इनकार कर दिया है । सबने अपने अपने तर्क देते हुए अपनी उम्मीदवारी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है । 

जानें क्या बोले फारुख अब्दुल्ला और शरद पवार ....

मैं भारत के राष्ट्रपति पद के लिए संभावित संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के रूप में अपने नाम के विचार को वापस लेता हूं। मेरा मानना है कि जम्मू-कश्मीर एक महत्वपूर्ण मोड़ से गुजर रहा है और इन अनिश्चित समय में नेविगेट करने में मदद के लिए मेरे प्रयासों की आवश्यकता है। मेरे आगे बहुत अधिक सक्रिय राजनीति है। मैं जम्मू-कश्मीर और देश की सेवा में सकारात्मक योगदान देने के लिए तत्पर हूं। मेरा नाम प्रस्तावित करने के लिए मैं ममता दीदी का आभारी हूं। मैं उन सभी वरिष्ठ नेताओं का आभारी हूं, जिन्होंने मुझे अपना समर्थन दिया। 

- फारूक अब्दुल्ला 


मैं राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारों की दौड़ में नहीं हूं। जल्द ही विपक्ष की तरफ से संयुक्त प्रत्याशी की घोषणा कर दी जाएगी। 

 - शरद पवार  

क्या विपक्ष की एकजुटता न होना है कारण ?

विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को खारिज करने वाले चारों नेताओं ने कोई न कोई तर्क देते हुए खुद को इस रेस से बाहर कर लिया है । हालांकि जानकार कहते हैं कि इन चारों द्वारा अपनी उम्मीदवारी को खारिज करने के पीछे बड़ा कारण विपक्ष का अभी भी एकजुट न होना है । जानकारों का कहना है कि विपक्ष एकजुट नहीं है , जिसे ये चारों नेता भी जानते हैं । बिना एकजुट हुए चुनाव जीतना भी नामुमकिन होगा । ऐसे में चारों नेताओं ने अपने तर्क देते हुए अपनी उम्मीदवारी को खारिज कर दिया है । हालांकि ऐसी भी खबरें आई थी कि पूरा विपक्ष फारुख अब्दुल्ला के नाम पर एकराय नहीं था । अब्दुल्ला कई बार विवादित बयान दे चुके हैं , जिसका लाभ भाजपा 2024 के चुनावों में उठा सकती है । 

अब लालू - मुलायम - यशवंत सिन्हा के नाम पर हो रही चर्चा 

बहरहाल , अब खबर यह भी आ रही है कि विपक्ष अब समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव, राजद के प्रमुख लालू यादव, केरल से सांसद एनके प्रेमचंद्रन, यशवंत सिन्हा के नाम पर विचार कर रहा है। कल यानी 21 जून को ही विपक्ष की दूसरी बैठक भी होगी। ये बैठक शरद पवार खुद बुला रहे हैं। हालांकि, इस बार ममता बनर्जी ने बैठक से दूरी बना ली है। वह अपनी जगह भतीजे अभिषेक बनर्जी को भेजेंगी। बताया जाता है कि ममता भी अब मान चुकी हैं कि वह विपक्ष को एकजुट नहीं कर पाएंगी। कई विपक्षी दल उनका नेतृत्व स्वीकार नहीं करना चाहते हैं। इसलिए वह दूरी बनाने लगीं हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि इस बैठक में विपक्ष की ओर से तैयार देश के बड़े अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, पूर्व राजनयिकों के नाम पर चर्चा होगी। 

ये है राष्ट्रपति चुनाव का कार्यक्रम 

राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना 15 जून को जारी हो चुकी है। नामांकन की आखिरी तारीख 29 जून है। नामांकन पत्रों की जांच 30 जून तक होगी। उम्मीदवार अपना नामांकन दो जुलाई तक वापस ले सकेंगे। राष्ट्रपति का चुनाव 18 जुलाई को होगा, जिसके नतीजे 21 जुलाई को आएंगे। 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण समारोह होगा। 

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