Monday, June 17, 2024

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आखिर क्यों दीप सिद्धू के ‘वारिस’ ने पंजाब में मचा रखा है बवाल, जानें क्यों बताया जा रहा भिंडरावाले 2.0

अंग्वाल न्यूज डेस्क
आखिर क्यों दीप सिद्धू के ‘वारिस’ ने पंजाब में मचा रखा है बवाल, जानें क्यों बताया जा रहा भिंडरावाले 2.0

नई दिल्ली। पंजाब में इस समय माहौल काफी गर्म है, जहां गुरुवार को अजनाला में ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन प्रमुख अमृत पाल सिंह के समर्थकों के आगे पुलिस प्रशासन को भी झुकना पड़ा. और आखिरकार उसे हिंसा पर उतारू भीड़ को रोकने के लिए अमृतपाल के सहयोगी लवप्रीत सिंह तूफान को रिहा करने पर हामी भरनी पड़ी. अमृतपाल सिंह उसी ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन का प्रमुख है जिसका गठन दीप सिद्धू ने किया था. पंजाब में सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर जागरूकता लाने के उद्देश्य से साथ गठित यही संगठन अब कट्टरपंथी भावनाएं भड़काने के लिए लगातार विवादों में बना हुआ है. किसान आंदोलन के समय हिंसा को लेकर विवादों में घिरे सिद्धू की पिछले साल फरवरी में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी.

पंजाब में वारिस पंजाब दे संगठन की स्थापना सिद्धू ने की थी और इसका उद्देश्य पंजाब में सामाजिक-सांस्कृतिक उत्थान के लिए लोगों के बीच जागरूकता फैलाना बताया गया था. सिद्धू की अचानक मौत के बाद संगठन में उसकी जगह लेने वाले अमृतपाल को खालिस्तान समर्थक और कट्टरपंथी भावनाओं को भड़काने के लिए भिंडरावाले 2.0 बताया जा रहा है. वह 2022 में ही अपना ट्रांसपोर्ट का बिजनेस छोड़कर भारत आया था. वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख बनने के बाद से ही वह बड़ी संख्या में पंजाब के लोगों को अपने साथ जोड़ने में लगा है. वैसे इस संगठन के बैनर तले पंजाब को नशे से मुक्त कराने का अभियान चलाने का दावा भी किया जा रहा है. बहरहाल, अमृतपाल की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर लगातार आशंकाएं जताई जाती रही हैं, और यह गुरुवार को अजनाला में उस समय सही भी साबित हुईं जब अमृतपाल के करीबी सहयोगी बताए जा रहे लवप्रीत सिंह को छुड़ाने के लिए हजारों की संख्या में लोग थाने के बाहर एकत्र हो गए. 

अमृतसर जिले के जल्लूपुर खेड़ा गांव के रहने वाले अमृतपाल का जन्म 1983 में हुआ था. वह 2012 में काम के सिलसिले में दुबई चला गया था जहां ट्रांसपोर्ट के बिजनेस से जुड़ा था. पिछले साल ही वहां से लौटा अमृतपाल खालिस्तान समर्थक मूवमेंट चलाने वाले भिंडरावाले का समर्थक बताया जाता था. वह पहले भी कई मामलों में विवादों में घिरा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में वह ईसा मसीह पर टिप्पणी को लेकर विवादों में घिरा था, जिसके खिलाफ पंजाब क्रिश्चियन मूवमेंट के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था. इस समय वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने के मामले में भी सुर्खियों में है. सोशल मीडिया पर लगातार ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि अमृतपाल की सक्रियता और बड़ी संख्या में लोगों के उसके साथ जुटने से कहीं पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह पटरी से न उतर जाए. अपनी शक्ल-सूरत और पहनावे की वजह से भी अमृतपाल की तुलना भिंडरावाले से की जा रही है. 

लवप्रीत मामले में पुलिस को दिखाया दम

अमृतपाल के जिस सहयोगी की गिरफ्तारी को लेकर गुरुवार को पंजाब में जबर्दस्त बवाल मचा वह पंजाब के गुरदासपुर के रहने वाला है. उसे अजनाला पुलिस ने एक व्यक्ति के अपहरण और पिटाई के मामले में गिरफ्तार किया था. इस मामले में अमृतपाल सिंह समेत 20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में तूफान की गिरफ्तारी के बाद ही बवाल शुरू हो गया और हजारों की संख्या में अमृतपाल के सहयोगियों ने थाने पर धावा बोल दिया. परिवार ने यह तो माना कि लवप्रीत अमृतपाल के नेतृत्व वाले समूह वारिस पंजाब दे के साथ जुड़ा है. हालांकि, मारपीट की घटना से उसका कुछ लेना देना नहीं है. बाद में, प्रदर्शनकारियों के आगे दबाव में झुकते हुए पंजाब पुलिस ने भी कहा कि लवप्रीत के घटनास्थल पर मौजूद न होने के सबूत मिले हैं, और उसे जल्द ही छोड़ दिया जाएगा.

किसान आंदोलन में आया था सिद्धू का नाम

लवप्रीत मामले में थाने का घेराव करने वाले लोग उसी वारिस पंजाब दे संगठन के सदस्य बताए जा रहे हैं जिसका गठन कभी सिद्धू ने किया था. सिद्धू पंजाब के मुक्तसर जिले में 1994 को जन्मा एक प्रमुख लोकगायक था और उसने पंजाबी फिल्म जगत में भी खास पहचान बनाई थी. सिद्धू ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की और ग्रासिम मिस्टर पर्सनैलिटी और ग्रासिम मिस्टर टैलेंटेड जैसे तमगे भी हासिल किए. मॉडलिंग के दौरान सिद्धू ने हेमंत त्रिवेदी, रोहित गांधी जैसे तमाम डिजाइनरों के लिए रैंप वॉक भी किया. इसके बाद वकालत के पेशे में भी हाथ आजमाया. पुणे से वकालत की डिग्री लेने के बाद वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की. बाद में कानून प्रैक्टिस छोड़कर फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बने और कुछ प्रोडक्शन हाउस के साथ जुड़े रहे. सिद्धू ने बाद में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 2015 में पंजाबी फिल्म रमता जोगी से की थी, जिसे फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र के प्रोडक्शन हाउस ने बनाया था. 

2017 में आई फिल्म जोरा दास नंबरिया, 2018 में रंग पंजाब और साढे अल्‍ले नामक फिल्मों के जरिये सिद्धू ने पंजाबी फिल्म जगत में अच्छी-खासी पहचान बना ली. बाद में किसान आंदोलन शुरू होने के दौरान सिद्धू उससे जुड़ गए. उनका एक पुलिस अधिकारी के साथ बहस करने का वीडियो खासा वायरल हुआ. बाद में लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज की जगह केसरिया झंडा फहराने पर विवाद बढ़ा तो सिद्धू का नाम काफी तेजी से उछला. हालांकि, इस विवाद को लेकर सिद्धू ने सफाई दी कि उन्होंने देश के झंडे को नहीं हटाया और उन्हें कट्टरपंथी नहीं बताया जाना चाहिए. बहरहाल, लाल किले पर हिंसा के मामले में सिद्धू को आरोपी बनाया गया और उस समय गिरफ्तारी भी हुई थी. 15 फरवरी 2022 को हरियाणा में एक सड़क हादसे में सिद्धू की मौत हो गई.

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