Tuesday, March 31, 2020

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अमेरिका- ईरान के बीच युद्ध की स्थिति , जानिए कौन सा देश किसके साथ खड़ा नजर आएगा

अंग्वाल न्यूज डेस्क
अमेरिका- ईरान के बीच युद्ध की स्थिति , जानिए कौन सा देश किसके साथ खड़ा नजर आएगा

नई दिल्ली । अमेरिका द्वारा हवाई हमले में ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच अब स्थिति युद्ध के करीब आ गई है । ईरान  की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कोर्प्स (IRGP) ने अमेरिका की कई धमकियों के बीच इराक में 2 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बेलिस्टिक मिसाइल से हमले किए । इस हमले में अमेरिकी जवानों के साथ 80 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है । इतना ही नहीं इस हमले में कई अमेरिकी विमानों के भी ध्वस्त होने की बात कही जा रही है । इस सब के बीच ईरान ने धमकी दी है कि अगर स्थिति अब आगे खराब हुई तो वह अमेरिका के मित्र देशों पर भी हमला कर सकता है । ईरान ने अपने यहां मस्जिदों पर लाल झंडा फहराकर युद्ध के संकेत दे दिए हैं । वहीं अमेरिका पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर ईरान किसी भी अमेरिकी नागरिक और संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है तो उसके परिणाम बेहद ही खतरनाक हो सकते हैं । इस सब के बाद कई देश ईरान और कई अमेरिका के पक्ष में खड़े होते नजर आ रहे हैं। 

दोनों देशों के रुख से यह तो साफ हो गया कि कोई भी इस मामले में आगे झुकने वाला नहीं है , ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच गतिरोध बढ़ने और युद्ध की स्थिति पैदा होने की आशंका व्यक्त की जा रही है । ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच वॉर होता है तो कौन सा देश किसके साथ खड़ा होगा । 

भले ही दुनिया के कई देश इन दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के प्रयास कर रहे हों , लेकिन दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध के बीच अब ये देश धड़ों में बंटते नजर आ रहे हैं । 

जानकारों के मुताबिक , अमेरिका से युद्ध करने के दौरान ईरान को बड़े देशों का साथ शायद ही मिले । लेकिन अगर बात लेबनान, यमन, सीरिया, फिलिस्तीन और इराक की करें तो ये देश ईरान के साथ खड़े नजर आएंगे । वह भी ऐसी स्थिति में जब अमेरिका प्रोक्सी वार यानी सीधे युद्ध ना करके तीसरी शक्ति का इस्तेमाल करके अमेरिका को नुकसान पहुंचाया जाए। मतलब ईरान आतंकवाद का सहारा अमेरिका को नुकसान पहुंचाने के लिए ले सकता है।


वहीं ईरान का साथ रूस और चीन भी दे सकते हैं । चीन भी जनरल सुलेमानी की हत्या पर निंदा कर चुका है । रूस ने इस कार्रवाई को अवैध कार्रवाई बताया तो चीन ने सीधे तौर पर तो अमेरिका को कुछ कहा नहीं है , लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि बीजिंग इस मामले पर चिंतित है । वैसे भी पूरी दुनिया को पता है कि चीन और रूस का अमेरिका से छत्तीस का आंकड़ा है । भले ही वो सीधे ईरान के साथ ना हो, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से ईरान की मदद कर सकते हैं ।

लेकिन जब सीधे युद्ध की स्थिति बनती है तो निश्चित तौर पर ईरान के साथ रूस और चीन जा सकता है । क्योंकि मीडिल ईस्ट से रूस और चीन के अपने-अपने हित जुड़े हुए हैं । मीडिल ईस्ट में अमेरिका की दखलअंदाजी का दोनों देश आए दिन विरोध जताते रहे हैं ।वहीं अमेरिका ईरान के खिलाफ जंग का ऐलान करता है तो उसके साथ सऊदी अरब, इजरायल और खाड़ी देश का समर्थन मिल सकता है । हालांकि ये देश भी अमेरिकी और ईरान को संयम बनाए रखने की बात कह रहे हैं । फ्रांस और इंग्लैंड का साथ भी अमेरिका को मिल सकता है लेकिन यूरोपीय संघ अमन और शांति बहाली की अपील की है ।

इजरायल और सऊदी अरब ईरान को अपना जानी दुश्मन मानते हैं ।  ऐसे में वो अमेरिका के साथ खड़े नजर आएंगे । ईरान और लेबनान के आतंकवादी संगठन हिजबुल्ला यहूदी बाहुल्य देश इजराइल से नफरत करते हैं । वहीं सऊदी अरब और ईरान के बीच शिया-सुन्नी की लड़ाई है. ईरान में ज़्यादातर शिया मुसलमान हैं, वहीं सऊदी अरब ख़ुद को एक सुन्नी मुस्लिम शक्ति की तरह देखता है ।

दशकों से सऊदी अरब खुद को मुस्लिम दुनिया का नेता मानता आ रहा था, लेकिन साल 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति ने सऊदी अरब को चुनौती दी । ऐसे में सऊदी अरब को पसंद नहीं आया और दोनों के बीच दूरियां बढ़ती गई । 2003 में अमरीका की अगुवाई में सद्दाम हुसैन को गद्दी से हटा दिया गया जो कि ईरान का विरोधी था । सऊदी अरब के कैंप में यूएई, कुवैत, बहरीन, मिस्र और जॉर्डन है, यहां पर सुन्नी ज्यादा है. ये देश भी ईरान को पसंद नहीं करते हैं । ऐसे में इनका साथ भी अमेरिका को मिल सकता है ।

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