Thursday, December 1, 2022

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Rajasthan Congress Crisis : गहलोत - पायलट आज दिल्ली में , सोनिया मुलाकात के बाद लगाएंगी दोनों के सियासी भविष्य पर मुहर

दीपक गौड़
Rajasthan Congress Crisis : गहलोत - पायलट आज दिल्ली में , सोनिया मुलाकात के बाद लगाएंगी दोनों के सियासी भविष्य पर मुहर

नई दिल्ली । राजस्थान कांग्रेस में कुर्सी को लेकर मचा घमासान अभी थमता नजर नहीं आ रहा है । सुबे के सीएम अशोक गहलोत आज दिल्ली पहुंच रहे हैं । खबर है कि बुधवार दोपहर 3 बजे वह सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे । आज की मुलाकात के बाद लिया गया निर्णय तय करेगा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरेंगे या नहीं । असल में , राजस्थान में हुए हालिया घटनाक्रम के बाद से सोनिया गांधी अपने सबसे विश्वासपात्र गहलोत से बेहद नाराज बताई जा रही हैं। हालांकि इस पूरे प्रकरण में पर्यवेक्षकों ने उन्हें क्लीनचिट तो दे दी है लेकिन उनके सियासी भविष्य पर अंतिम मुहर अब सोनिया गांधी ही लगाएंगी । वहीं सचिन पायलट भी दिल्ली में ही हैं । वह फिर से सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं । प्रियंका और राहुल गांधी ने इस बार उन्हें बड़ी कमान सौंपे जाने का भरोसा दिलाया है, लेकिन उनके सियासी भविष्य पर भी अंतिम मुहर सोनिया गांधी ही लगाएंगी । 

सियासी गणित बैठाने की जुगत में आलाकमान

असल में , राजस्थान में पिछले दिनों जो हुआ है , उससे एक बार फिर से राजस्थान में कांग्रेस दो फाड़ हो गई है । एक धड़ा जहां अशोक गहलोत के साथ खड़ा नजर आया, तो इस बार सचिन पायलट गुट के नेता भी खुलकर गहलोत खेमे पर हमला बोलते नजर आए हैं। इस समय जहां कांग्रेसी विधायक और नेता इन दो गुटों में बंट गए हैं , वहीं एक तीसरा गुट वह है जो आलाकमान के कड़े रुख के बाद तटस्थ हो गया है । उनका कहना है कि जो आलाकमान से फैसला आएगा , वह उसे पूरी तरह मानेंगे । ये विधायक उनमें से हैं जो पहले गहलोत गुट के साथ थे और अपने इस्तीफे का ऐलान कर चुके हैं । लेकिन अब किसी गुट के बजाए पार्टी के साथ होने की बात कह रहे हैं । बहरहाल, अशोक गहलोत को तो पूरे प्रकरण की जांच के बाद क्लीनचिट दे दी गई है , वहीं कुछ नेताओं के खिलाफ अनुशासनहीनता के आरोपों के तहत कार्रवाई की संस्तुति हुई है । उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अब ये नेता अलग ही गुट बनाए हुए हैं । ऐसे में इस समय पार्टी आलाकमान इन सबके बीच ऐसा गणित बैठाने की जुगत में है कि विपक्षी भाजपा को खेल करने का कोई मौका न मिले । 

सचिन पायलट CM बनेंगे या प्रदेश अध्यक्ष!

इस घटनाक्रम के बीच सचिन पायलट ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से कई बार फोन पर बात करते हुए अपना दुखड़ा रोया । उन्होंने बार बार अपनी बेइज्जती का हवाला दिया, जिसपर उन्हें अच्छे फैसले का आश्वासन मिला है । ऐसी खबर है कि पहले सोनिया भी सचिन पायलट को राजस्थान का सीएम बनाने और गहलोत को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर सहमत थीं , लेकिन हालिया घटनाक्रम से गहलोत के नंबर कम हुए हैं । ऐसे में संभव है कि सचिन पायलट को सुबे की कमान सौंप दी जाए । अगर गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद पर काबिज हुए तो ऐसा होना लगभग तय माना जा रहा है । अगर ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बना दिया जाए और गहलोत को सीएम ही बना रहने दिया जाएगा । 

मीरा कुमार भी अध्यक्ष पद की दौड़ में


राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर होने पर अब कांग्रेस में इस पद के लिए कई दावेदार सामने आ रहे हैं । अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 30 सितंबर है । कुछ लोगों ने नामांकन का फॉर्म लिया है तो कुछ अभी अंतिम समय का इंतजार कर रहे हैं । शशि थरूर , दिग्विजय सिंह , अशोक गहलोत , मनीष तिवारी , मुकुल वासनिक , कुमारी शैलजा, मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ ही अब मीरा कुमार का नाम भी इस पद के दावेदारों के रूप में सामने आया है । हालांकि कमलनाथ पहले तो मना कर चुके हैं , लेकिन सोनिया गांधी से मुलाकात के लिए वह भी कल दिल्ली में थे । 

इन्हें मिला कारण बताओ नोटिस

इससे इतर, कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने  राजस्थान के मंत्रियों शांति धारीवाल, महेश जोशी , धर्मेंद्र राठौड़ को उनकी ‘घोर अनुशासनहीनता’ के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया । पार्टी की समिति ने उनसे 10 दिन के भीतर यह बताने के लिए कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए । यह नोटिस तब भेजे गए हैं जब इससे पहले AICC के  पर्यवेक्षकों मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन ने तीनों पर ‘घोर अनुशासनहीनता’ का आरोप लगाते हुए पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी । तारिक अनवर द्वारा जारी नोटिस में कहा गया, ‘यह कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए आपसे 10 दिन में यह बताने को कहा जाता है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संविधान के प्रावधानों के अनुसार आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। 

बागी हुए विधायक बोले - हम आलाकमान के साथ

इस सबके बीच थोड़े समय के लिए बागी हुए कुछ विधायकों ने फिर से पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई है । अशोक गहलोत की जगह मुख्यमंत्री के रूप में सचिन पायलट की जगह लेने की संभावना के खिलाफ इस्तीफा देने विधायकों के सुर बदल गए हैं । ऐसे कुछ विधायकों ने कहा कि वे आलाकमान का समर्थन करते हैं और मुख्यमंत्री के रूप में पायलट के साथ कोई समस्या नहीं है, जबकि उनमें से कुछ ने कहा कि उन्हें पता नहीं था कि उन्हें कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए क्यों मनाया गया था । बामनवास विधायक इंदिरा मीणा ने कहा: "मैंने एक कागज पर हस्ताक्षर किए , लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह क्या था." उन्होंने कहा कि पायलट सीएम बने तो अच्छा होगा । 

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