Thursday, January 23, 2020

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उत्तराखंड - ऑल वेदर रोड परियोजना नहीं हो पाएगी समय पर पूरी , करीब 5 हजार करोड़ की लागत बढ़ेगी 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
उत्तराखंड - ऑल वेदर रोड परियोजना नहीं हो पाएगी समय पर पूरी , करीब 5 हजार करोड़ की लागत बढ़ेगी 

देहरादून । केंद्र की मोदी सरकार की बहुप्रतिक्षित ऑल वेदर रोड परियोजना का काम पिछले कुछ समय से बहुत धीमी गति से चल रहा है । इस परियोजना को 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था लेकिन अभी तक बहुत काम इस परियोजना का शुरू भी नहीं हुआ है । ऐसे में इस परियोजना को अंजाम तक पहुंचाने में अभी काफी समय लगेगा , जिससे इस परियोजना की लागत भी बढ़ेगी । मिली जानकारी के अनुसार , 11 हजार 700 करोड़ रुपये की इस परियोजना में अब स्थिति यह आ गई है कि समय पर परियोजना के पूरा नहीं हो पाने के चलते इस परियोजना की लागत करीब में करीब 5 हजार करोड़ रुपये का इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है । 

एक बड़े हिस्से में अभी काम शुरू नहीं

ऑल वेदर रोड परियोजना को अंजाम देने में जुटी एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार , अभी इस परियोजना के एक बड़े हिस्से में अभी काम शुरू भी नहीं हुआ है ।  करीब 900 किमी की इस परियोजना में  भागीरथी इको सेंसिटिव जोन की परिधि में काम अभी शुरू नहीं हो पाया है। वहीं अभी तक जिन इलाकों में काम शुरू हुआ है , वह पिछले कुछ समय में मौसम और तीर्थ यात्रा के सीजन के चलते काम प्रभावित रहा है । 

कई बाइपास पर विरोध अभी जारी

इस परियोजना से जुड़ी एजेंसियों से मिले इनपुट के अनुसार , इस परियोजना के तहत 12 बाइपास स्वीकृत हुए हैं , लेकिन आलम यह है कि इनमें से कई बाइपास स्थानीय लोगों के विरोध व अन्य कारणों से चलते अभी भी लटके हैं।


कई हिस्सों में काम शुरू भी नहीं हुआ

परियोजना से जुड़े अफसरों का कहना है कि करीब 900 किमी वाली इस परियोजना में से 434.39 किमी के लिए प्रदेश के लोक निर्माण विभाग को की कार्यदायी एजेंसी बनाया गया है । लोनिवि को 26 सिविल कार्य करने हैं, जिनमें से कुछ पर तो अभी काम शुरू भी नहीं हो पाया है । 

अभी लगेंगे तीन साल

परियोजना से जुड़ अफसरों का कहना है कि आने वाले समय में कोई बाधा न आई तो भी इस परियोजना के पूरे होने की समयसीमा 2022 तक तो जाएगी ही। अगर फिर से कोई बाधा आती है तो यह समयसीमा और आगे बढ़ेगी । हालांकि इस परियोजना पर सीधे पीएमओ नजर बनाए हुए है । यहां होने वाले काम को लेकर समय समय पर प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और प्रदेश सरकार के स्तर पर समीक्षा बैठकें होती रहती हैं।  

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