Thursday, January 23, 2020

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अमेरिकी कंपनी की नौकरी छोड़ पहाड़ों में मशरूम और फूलों की खेती करने लौटा ललित उप्रेती

अंग्वाल न्यूज डेस्क
अमेरिकी कंपनी की नौकरी छोड़ पहाड़ों में मशरूम और फूलों की खेती करने लौटा ललित उप्रेती

पिथौरागढ़ । पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड में युवा उद्यमियों ने ऐसी मिसाल पेश की है , जिसने शहरों में नौकरी कर रहे कई युवाओं को पहाड़ की ओर अपना रुख करने को मजबूत कर दिया है। पौड़ी की मशरूम गर्ल दिव्या रावत के काम से प्रेरित होकर अब एक और युवा ने पहाड़ को अपनी कर्मभूमि बनाने का फैसला लिया है । खास बात यह है कि यह युवा एक अमेरिकी कंपनी में अच्छे पैकेज पर काम कर रहा था लेकिन 38 वर्षीय ललित उप्रेती ने अपनी नौकरी छोड़कर अपने गंगोलीहाट इलाको को मशरूम और फूलों का हब बनाने की जिद ठान ली है । आलम यह है कि शहरों की नौकरी छोड़ अपने घर लौट आए ललित इस समय अपने गांव में फूलों की खेती के साथ ही मशरूम, सब्जी, दुग्ध उत्पादन का काम कर रहे हैं । इससे उन्हें अभी 40 हजार रुपये प्रतिमाह की आमदनी हो रही है । इतना ही नहीं वह अपने इस काम के जरिए पांच अन्य लोगों को रोजगार देने में भी कामयाब हुए हैं । 

बता दें कि गंगोलीहाट के कुंजनपुर निवासी ललित उप्रेती अमेरिकी कंपनी डीआई सेंट्रल लिमिटेड में एरिया मैनेजर थे। पिछले 7 सालों में वह कंपनी की ओर से कई देशों की यात्रा कर चुके हैं , लेकिन अब उन्होंने अपनी जीवन के लिए एक नया लक्ष्य बनाया है । यह लक्ष्य उन्होंने साल भर पहले पौड़ी की मशरूम गर्ल दिव्या रावत के बारे में पढ़कर बनाया । उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ते हुए अपने इलाके को भी मशरूम और फूलों का हब बनाने का फैसला लिया है । 

ललित ने मई 2019 से फूल और मशरूम की खेती शुरू कर दी। ललित बताते हैं कि गंगोलीहाट की आबोहवा के अनुरूप उन्होंने एक नाली जमीन में ग्लेडियस प्रजाति के फूलों के बीज रोपे। 


अभी शुरूआती दौर में ही उन्हें 40 हजार रुपये प्रतिमाह की कमाई हो रही है । वह फूलों को पिथौरागढ़ और हल्द्वानी में बेचते हैं। ग्लेडियस के साथ ही हजारी के फूलों की भी अच्छी डिमांड है। ग्लेडियस की एक स्टिक 10 रुपये की तो हजारी के फूल 60-70 रुपये किलो बिक जाते हैं। उनका लक्ष्य अपनी 50 नाली जमीन में फूलों की खेती करने का है।

इतना ही नहीं ललित उप्रेति गांव में खाली पड़े पुराने मकान में मशरूम उत्पादन कर रहे हैं। अपने साथ वह गांव और आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं । उनका कहना है कि फूलों की खेती, मशरूम और दुग्ध उत्पादन पहाड़ों से पलायन को रोकने में कारगर हो सकता है, बशर्ते सरकार इसके लिए आगे आए और लोगों को आत्म निर्भर बनाने में मदद करे।  

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