Thursday, June 27, 2019

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अब 'उत्तराखंडी' चाय की खुशबू और फैलेगी, कफलांग में फैक्ट्री लगाने की प्रक्रिया शुरू

अंग्वाल न्यूज डेस्क
अब

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने विकास की गति को तेज करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए चाय विकास बोर्ड की ओर से चंपावत के कफलांग इलाके में चाय की प्रोसेसिंग फैक्ट्री लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए करीब 13.7 नाली जमीन मुहैया कराई गई है। चाय विकास बोर्ड के प्रबंधक डेसमंड के अनुसार करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली चाय प्रोसेसिंग फैक्ट्री के शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। प्रोसेसिंग फैक्ट्री की क्षमता प्रतिवर्ष करीब 50 हजार टन से ज्यादा चाय के उत्पादन की होगी। 

गौरतलब है कि पहले चंपावत के लीसा परिसर में चाय की छोटी फैक्ट्री लगाई गई थी लेकिन प्रदेश में चाय के उत्पादन का रकबा लगातार बढ़ते जाने से बड़ी फैक्ट्री लगाने की आवश्यकता महसूस हुई। अब चाय विकास बोर्ड का कहना है कि कफलांग में 13.7 नाली जमीन का आवंटन किया गया है। जल्द ही यहां पर चाय प्रोसेसिंग फैक्ट्री लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। चाय विकास बोर्ड के प्रबंधक डेसमंड का कहना है कि चंपावत में चाय की खेती से ज्यादातर महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में यहां नई फैक्ट्री के शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के और अवसर मुहैया होंगे। 

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यहां बता दें कि जिले में चाय की खेती का क्षेत्रफल लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में यहां 220 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में चाय का उत्पादन हो रहा है। जिले के सिलिंगटाक, मुडियानी, सुयालखर्क, चैकी, त्यारकूड़ा, लमाई, भगानाभंडारी, लधौना, नरसिंहडांडा, कालूखांड, भरछाना, खेतीगाढ, गोसनी, बलांई, फोर्ती, मंच दुबडजैनल, डिगडई, चैड़ाराजपुरा, गड़कोट, धौन, मझेड़ा, मटेला आदि जगहों पर चाय के नए बागान विकसित किए जा रहे हैं। चाय प्रबंधक डेसमंड के अनुसार 2014 से चंपावत में उत्पादित चाय कोलकाता में होने वाली अंतरराष्ट्रीय नीलामी में भी भेजी जा रही है।


आपको बता दें कि चंपावत में पैदा होने वाली चाय जैविक होने के साथ ही बेहद खुशबूदार होती हैं। यहां की चाय की मांग देश के अलावा विदेशांें में भी काफी मांग है। 

 

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