Friday, November 27, 2020

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कादर खान : इंजीनियरिंग का प्रोफेसर जिसने बॉलीवुड के हर क्षेत्र में झंडे गाढ़े , जानें उनके करियर का सफरनामा

अंग्वाल न्यूज डेस्क
कादर खान : इंजीनियरिंग का प्रोफेसर जिसने बॉलीवुड के हर क्षेत्र में झंडे गाढ़े , जानें उनके करियर का सफरनामा

नई दिल्ली । बॉलीवुड का ऐसा बहतरीन कलाकार- लेखक जिसने मुंबई में अपना करियर बतौर सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर के तौर पर शुरू किया , लेकिन बाद में हिंदी फिल्म जगत पर ऐसा छाया कि उनकी गिनती टॉप के चरित्र अभिनेता - खलनायक - हास्य कलाकारों में होती है । इतना ही नहीं उन्होंने कई फिल्मों में दमदार डायलॉग लिखे , यहां तक की कई फिल्मों की कहानियां भी लिखीं । जी हां , हम बात कर रहे हैं कादर खान की । 22 अक्तूबर वर्ष 1937 को पिशीन, पाकिस्तान में जन्में कादर खान की मौत लंबी बीमारी के बाद 31 दिसंबर 2018 को टोरंटो, कनाडा में हुई । 

नकल करने की आदत ने बनाया करियर

मुंबई के भायखला में स्थित एमएस साबू सिद्दीकी इंजीनियरिंग कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर कादर खान अपने शुरुआती दिनों में रंगमंच से भी जुड़े रहे । उनका जन्म 22 अक्तूबर को हुआ था । उन्हें बचपन से ही नकल उतारने का शौक था । उनकी प्रतिभा उन्हें रंगमंच तक ले गया , जहां 10 साल की उम्र में नाटकों में काम करना शुरू कर दिया था । 

बचपन गरीबी में बीता

कादर खान का बचपन बहुत गरीबी में बीता । उन्होंने बचपन से ही नाटकों में काम करना शुरू कर दिया, जिससे होने वाली कमाई से वह अपनी पढ़ाई करने लगे । पढ़ाई में बहुत होशियार कादर खान ने इस तरह अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की । कादर खान बॉम्बे युनिवर्सिटी के इस्माइल युसुफ कॉलेज से इंजीनियरिंग ग्रेज्यूएट हैं।  इसके बाद वह मुंबई के भायखला में स्थित एमएस साबू सिद्दीकी इंजीनियरिंग कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर नियुक्त हो गए । हालांकि इस सबके बीच भी उन्होंने नाटकों में काम करना बंद नहीं किया । 

 

''ताश के पत्ते'' से पहुंचे बॉलीवुड के शिखर पर

ताश के पत्ते ''  नामक नाटक में काम करते हुए उन्हें अभिनेता जलाल आगा ने देखा और कादर खान के अभिनय की तारीफ दिलीप कुमार से की । कादर खान की इस तरह की तारीफ सुनने के बाद दिलीप कुमार से भी रहा न गया और वो नाटक देखने पहुंच गए । दिलीप कुमार को भी नाटक और उसमें कादर खान का अभिनय बहुत पसंद आया। इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि कादर खान उनकी आने वाली फिल्म 'सगीना' और 'बैराग' में काम करेंगे । 

फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखने के आए ऑफर

बॉलीवुड में अपने अभियन की दुकान चलने के बाद फिल्म जगत ने उनकी बुद्धिमत्ता की भी जमकर सराहना की । उनकी समझ के कायल फिल्म निर्माताओं ने अब उन्हें फिल्म के डायलॉग लिखने के साथ ही उन्हें फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखने के भी ऑफर दिए । कादर खान ने भी फिल्म जगत को निराश नहीं किया और अपने डायलॉग के बलबूते फिल्मों में जान फूंक दी । इसके साथ ही उन्होंने कई फिल्मों की स्क्रिप्ट भी लिखी , जिसमें से अधिकांश हिट हैं । 

छात्रों में मशहूर थे

अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान वह अपने साथियों के बीच काफी मशहूर हो चुके थे । नाटकों में उनके अभिनय ने उन्हें सबका चहेता बना दिया था । कई सालों तक कादर खान शूटिंग के बाद रात को कॉलेज पहुंचते थे , जिसका छात्र उनका इंतजार करते थे ।  कोई उनके लिए गर्म चाय लेकर आता, तो कोई उनका सिर दबाता । कादर खान ने इंडस्ट्री में कई अच्छे दोस्त बनाए । निर्माता-निर्देशक मनमोहन देसाई, प्रकाश मेहरा, अमिताभ बच्चन, जीतेंद्र, डेविड धवन, गोविंदा जैसे सितारों से उनके घरेलू रिश्ते थे । 


जब मनमोहन देसाई बोले - अपनी शक्ल मत दिखाना

मनमोहन देसाई से उनकी मुलाकात अच्छी नहीं रही थी । वह कादर खान को देखकर खुश नहीं हुए थे । बस इतना बोले कि तुम्हारे डॉयलाग अगर मुझे अच्छे नहीं लगे तो मैं स्क्रिप्ट उठा कर दूर फेंक दूंगा, फिर कभी भी अपनी शक्ल मत दिखाना । लेकिन अगर उनका काम अच्छा लगे तो कंधे पर उठाकर नाचूंगा ।  अगले ही दिन कादर खान स्क्रिप्ट लेकर मनमोहन देसाई के घर पहुंचें. देसाई मन ही मन गुस्सा हुए, तय किया कि एक पेज पढ़ने के बाद स्क्रिप्ट फेंक देंगे, पर जब उन्होंने पढ़ना शुरू किया तो दस बार पढ़ा । फिर उठे , तो कादर खान को लगा कि देसाई गुस्सा हो गए हैं । देसाई जल्दी से अंदर गए, लौटे तो उनके हाथ में ब्रांड न्यू टीवी का सेट था , जो उन्होंने कादर खान को दे दिया । फिर पलटे और बोले - अभी शायद कुछ रह गया है । वह दौड़कर अंदर गए और एक सोने का ब्रेसलेट लेकर आए और कादर खान के हाथ में पहना दिया । इसके बाद भी देसाई संतुष्ट नहीं हुए और अंदर जाकर एक लिफाफा लेकर आए , जिसमें 21 हजार रुपये थे । कहा - यह सिर्फ शगुन है, बाकी एक लाख बाद में दूंगा ।  कहा कि आज से मेरी सभी फिल्में तुम ही लिखोगे।

इन फिल्मों को लिखा

कादर खान फिल्म जगत के उन अभिनेताओं में शुमार थे जो अपनी लेखनी के लिए भी बहुत प्रसिद्ध हुए । कादर खान ने 'अमर अकबर एंथनी', 'परवरिश', 'सुहाग', 'कुली', 'लावारिस', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'मिस्टर नटवरलाल', 'अग्निपथ', 'सत्ते पे सत्ता' और डेविड धवन की 'नंबर वन' सीरीज की सभी फिल्में लिखी थीं । इसके साथ ही उन्होंने कई फिल्मों के डायलॉग लिखे , जिसके चलते उन फिल्मों को आज भी उनके इन डॉयलॉग के चलते याद किया जाता है । कादर खान से जु़ड़े कई रोचक जानकारियां ...

- 1973 में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने के बाद से, कादर खान 300 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं। 

-अपनी पहली फिल्म दाग में कादर खान ने, अभियोजन पक्ष के वकील की भूमिका निभाई थी। 

- कादर खान के पिता अब्दुल रेहमान खान कंधार के थे तो माता इकबाल बेगर पिशिन (अंग्रेजों के समय भारत का हिस्सा) से थीं। 

- कादर खान के तीन बेटे हैं। उनके एक बेटा कनाडा में रहता है और ऐसा कहा जाता है कि कादर खान के पास कनाडा की भी नागरिकता है।

- कादर खान ने 250 से ज्यादा फिल्मों के संवाद लिखे हैं।

- फिल्म 'रोटी' के लिए मनमोहन देसाई ने कादर खान को संवाद लिखने के लिए 1,20,000 रुपये जैसी बड़ी रकम अदा की थी।

- कादर खान टेलीविजन पर एक कॉमेडी शो 'हंसना मत' प्रसारित कर चुके हैं। जिसे उन्होंने खुद बनाया था।

- अमिताभ की कई सफल फिल्मों के अलावा, कादर खान ने हिम्मतवाला, कुली नं वन, मैं खिलाडी तू अनाड़ी, खून भरी मांग, कर्मा, सरफरोश और धर्मवीर जैसी सुपर हिट फिल्मों के संवाद लिखे हैं।

- 2013 में, कादर खान को उनके फिल्मों में योगदान के लिए साहित्य शिरोमनी अवार्ड से नवाजा गया।

- कादर खान 1982 और 1993 में बेस्ट डायलॉग के लिए फिल्म फेयर जीत चुके हैं।

- कादर खान को 1991 को बेस्ट कॉमेडियन का और 2004 में बेस्ट सपोर्टिंग रोल का फिल्म फेयर मिल चुका है।

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