Saturday, September 30, 2023

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश - गैंगस्टर सलेम को 2030 तक नहीं छोड़ सकते , भगौड़े माल्या को सुनाई सजा- जुर्माना

अंग्वाल न्यूज डेस्क
सुप्रीम कोर्ट का आदेश - गैंगस्टर सलेम को 2030 तक नहीं छोड़ सकते , भगौड़े माल्या को सुनाई सजा- जुर्माना

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने आज दो अलग अलग मामलों में मुंबई बम धमाकों 1993 के आरोपी गैंगस्टर अबू सलेम और भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को करारा झटका दिया है । कोर्ट ने जहां अबु सलेम को लेकर कहा कि हम सलेम को 2030 तक जेल से रिहा नहीं कर सकते । जब सलेम की 25 साल की जेल की अवधि पूरी हो जाएगी, तो उसके बाद केंद्र सरकार राष्ट्रपति को भारत और पुर्तगाल के बीच प्रत्यर्पण संधि को लेकर सलाह दे सकती है । इससे इतर , सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के अवमानना मामले में फैसला सुनाते हुए भगौड़े व्यापारी विजय माल्या को दोषी करार दिया । सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या को 4 महीने की सजा सुनाई है और 2000 रुपये का जुर्माना लगाया है ।

अबु सलेम के केस में कहा कहा सुप्रीम कोर्ट ने...

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गैंगस्टर अबु सलेम की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया , जिसमें उसने प्रत्यार्पण संधि की बात रखते हुए अपनी रिहाई की मांग की थी । याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि, प्रत्यर्पण संधि कोर्ट पर लागू नहीं होती है, इसलिए जो भी सजा होगी, वह कोर्ट तय करेगी । अबु सलेम ने अपनी याचिका में आजीवन कारावास को इसे आधार बनाते हुए चुनौती दी थी कि वर्ष 2002 में प्रत्यर्पण के वक्त भारत की ओर से पुर्तगाल को जो आश्वासन दिया गया था उसमें कहा गया था कि सलेम को 25 साल से ज्यादा की सजा नहीं होगी । 

विजय माल्या केस में सुनाई फैसला


ऐसे ही एक अन्य मामले में न्यायमूर्ति यू यू ललित की अगुवाई वाली पीठ ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को बड़ा झटका दिया । कोर्ट ने 2017 के अवमानना के मामले में उन्हें दोषी करार दिया । सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या को 4 महीने की सजा सुनाई है और 2000 रुपये का जुर्माना लगाया है । SC ने माल्या को 4 सप्ताह के भीतर ब्याज के साथ 4 करोड़ डॉलर जमा करने को कहा । कोर्ट ने इस दौरान चेतावनी देत हुए कहा कि अगर वह ऐसा करने में विफल रहता है तो उसकी संपत्तियों की कुर्की हो जाएगी । 

बता दें कि विजय माल्या पर उनके किंगफिशर एयरलाइन से जुड़े 9,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण घोटाले में शामिल होने का आरोप है और अवमानना के मामले में उसे दोषी करार दिया गया है । असल में न्यायमूर्ति ललित, न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने इस मामले की सजा की अवधि तय करने संबंधी अपना फैसला 10 मार्च को सुरक्षित रख लिया था और टिप्पणी की थी कि माल्या के खिलाफ सुनवाई में अब कोई प्रगति नहीं हो सकती ।  

असल में माल्या को अवमानना के लिए 2017 में दोषी ठहराया गया था और उनकी प्रस्तावित सजा के निर्धारण के लिए मामले को सूचीबद्ध किया जाना था । शीर्ष अदालत ने 2017 के फैसले पर पुनर्विचार के लिए माल्या की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका 2020 में खारिज कर दी थी । कोर्ट ने अदालती आदेशों को धता बताकर अपने बच्चों के खातों में चार करोड़ डॉलर भेजने को लेकर उन्हें अवमानना का दोषी माना था । 

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