Wednesday, August 5, 2020

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क्या कांग्रेस में शीर्ष स्तर पर शुरू हो रही गुटबाजी! , सोनिया बनाम राहुल-प्रियंका के गुटों में वर्चस्व की लड़ाई

अंग्वाल न्यूज डेस्क
क्या कांग्रेस में शीर्ष स्तर पर शुरू हो रही गुटबाजी! , सोनिया बनाम राहुल-प्रियंका के गुटों में वर्चस्व की लड़ाई

नई दिल्ली । कांग्रेस पार्टी में इस समय राष्ट्रीय स्तर पर भीतरघात और गुटबाजी चरम पर नजर आ रही है । राहुल गांधी द्वारा कांग्रेस  के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की जिद पर अड़ने के बाद काफी समय तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद खाली रहा और काफी हो हंगामे के बाद आखिरकार एक बार फिर से सोनिया गांधी इस पद पर काबिज हो गईं। हालांकि इसके बाद से लगातार कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और पार्टी के दिग्गज नेताओं के बागी तेवर ने पार्टी आलाकमान को परेशानी में डाला है । लेकिन राजस्थान की सियायत में हुए हालिया घटनाक्रम ने ऐसे संकेत दिए हैं कि इस समय सोनिया गांधी गुट बनाम - राहुल -प्रियंका गुट के बीच काफी ठन गई है । ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को मनाने के लिए जहां पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने गुट के कुछ लोगों को लगाया था , वहीं सोनिया गांधी के काफी करीबी लोगों में शुमार लोग सचिन पायलट पर लगातार हमले कर रहे हैं और उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने पर अमादा हैं। 

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सचिन पायलट ने खोला मोर्चा

बता दें कि बीते कुछ समय से राजस्थान की गहलोत सरकार के खिलाफ जिस तरह से विरोध के स्वर उठ रहे थे , उसमें सुबे के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी अपना सुर मिला दिया । वो भी न केवल उपमुख्यमंत्री रहते हुए बल्कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए । सचिन पायलट ने गहलोत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब से राहुल गांधी पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाए गए हैं , उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है । गहलोत ने अफसरों से कह रखा है कि मेरी बात न सुनें। पार्टी और सरकार के फैसलों में मेरी कोई राय ली ही नहीं जाती । ऐसा कहते हुए सचिन पायलट ने पार्टी के भीतर गुटबाजी को उजागर कर दिया । 

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अशोक गहलोत की 10 जनपथ पर पकड़

राजनीति के जानकारों का भी मानना है कि मौजूदा समय में सचिन पायलट की तुलना में अशोक गहलोत की 10 जनपथ पर ज्यादा पकड़ा है , मतलब वह सोनिया गांधी के ज्यादा करीबी और विश्वास पात्र लोगों में शामिल हैं । सचिन पायलट खुद कह चुके हैं कि पिछले लंबे समय से उनकी राहुल गांधी से कोई बात नहीं हुई है , वो भी ऐसे हालात में जब पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व में अपना खोया जनाधार पाने के लिए अपने शीर्ष युवा नेताओं को आगे ला रही है , ऐसे में हालिया घटनाक्रम पर राहुल गांधी का कुछ न बोलना भी यह संकेत देता है कि इस समय सोनिया गांधी गुट के नेता ज्यादा हावी हैं। 

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पार्टी के युवा नेताओं की लगातार अनदेखी


अगर कांग्रेस पार्टी में युवा नेताओं की बात करें तो एक समय राहुल गांधी के नेतृत्व में युवा टीम बनकर सामने आई थी , जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया , सचिन पायलट , मिलिंद देवड़ा , जतिन प्रसाद , प्रियंका गांधी समेत कई अन्य नेताओं की एक टीम बनती दिख रही थी । लेकिन मौजूदा समय की बात करें तो गांधी परिवार के दोनों सदस्यों को छोड़कर कोई भी कांग्रेस में किसी अहम भूमिका में नहीं है । जहां मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार को झटका देते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपाई हो गए हैं , वहीं राजस्थान में भी सचिन पायलट ने बागी तेवर अपना लिए हैं । भले ही वह भाजपा में न आने की बात कह चुके हैं , लेकिन कांग्रेस के प्रति उनके तेवरों से साफ हैं कि अब शायद ही वो लौटकर कांग्रेस में जा पाएं । वहीं मिलिंद देवड़ा और जतिन प्रसाद भी इस समय शांत हैं । 

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प्रियंका गांधी ने संभाला सचिन को मनाने का बीड़ा

अब भले ही सचिन पायलट को पार्टी के नेताओं की ओर से कोई आस न दिख रहे हों , लेकिन कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सचिन पायलट को मनाने का बीड़ा उठाया है । उन्होंने गत दिनों अहमद पटेल और वेणुगोपाल को इस काम की जिम्मेदारी दी थी , लेकिन मानों पार्टी इस मुद्दे पर दो गुटों में बंट गई है । जहां प्रियंका और उनके साथ के कुछ नेताओं ने सचिन पायलट को दोबारा कांग्रेस में आने और उन्हें मनाने की जुगत लगाई , वहीं पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं (कथित सोनिया गांधी गुट के) ने सचिन पायलट के खिलाफ हल्ला बोल दिया । खुद राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने सचिन को मनाने की जुगत को दरकिनार करते हुए पायलट पर जमकर हमला होला । उन्होंने सचिन पायलट को न केवल नाकारा निकम्मा करार दिया बल्कि कह दिया कि उन्होंने पार्टी की  पीठ मे छुरा मारा है । 

सचिन पायलट की सुनवाई नहीं

मौजूदा घटनाक्रम के बीच दिल्ली में अपने समर्थक विधायकों के साथ जमे बैठे सचिन पायलट ने अपने बयानों में कहा कि उन्होंने पार्टी से दिक्कत नहीं बल्कि राजस्थान में गहलोत के नेतृत्व से परेशानी है । वह लगातार इस मुद्दे पर पार्टी आलाकमान से बात करने और उनके फैसले का इंतजार करते रहे , लेकिन उन्होंने खुद कहा कि उनकी पार्टी आलाकमान से कोई बात नहीं हो सकी है । एक तरफ जहां सचिन पायलट पार्टी आलाकमान के फैसले का इंतजार करते रहे , वहीं उनकी पार्टी में उनके विरोधी हुए नेता, उनपर हमला बोलते रहे । 

क्या कांग्रेस में सीनियर बनाम जूनियर गुट बन गया है!

मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए इस तरह की बातें आने लगी हैं कि कांग्रेस में अब सोनिया गांधी के करीबियों का एक गुट बन गया है , जो पार्टी के युवा नेताओं के नेतृत्व में काम करने को तैयार नहीं है , न ही उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी देने के पक्ष में है । आपको याद होगा कि एक समय में राहुल गांधी को पार्टी का अध्यक्ष बनाए जाने का भी विरोध हुआ था , जिसके चलते कई कांग्रेसी नेताओं के बयान भी आए थे । पार्टी के कुछ नेताओँ ने राहुल गांधी की काबलियत पर सवाल उठाए थे । बहरहाल , मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया पर कमलनाथ को तरजीह देना और राजस्थान में सचिन पायलट पर अशोक गहलोत को तरजीह देने से यह संकेत पहले ही आ गए थे कि पार्टी में युवा नेताओं को अभी बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी । लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर जारी गतिरोध को पूरा नहीं तो थोड़ा बहुत तो उजागर कर ही दिया है । 

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