Monday, August 26, 2019

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सुप्रीम कोर्ट LIVE - रामजन्मभूमि विवाद पर रोजाना सुनवाई शुरू , CJI बोले - मस्जिद से पहले कोई ढांचा था तो सबूत दिखाएं

अंग्वाल संवाददाता
सुप्रीम कोर्ट LIVE - रामजन्मभूमि विवाद पर रोजाना सुनवाई शुरू , CJI बोले - मस्जिद से पहले कोई ढांचा था तो सबूत दिखाएं

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार से अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर रोजाना सुनवाई शुरू हो गई है । सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है । मंगलवार को जब अदालत में सुनवाई शुरू हुई तो सबसे पहले निर्मोही अखाड़े ने अपने तर्क रखे, इस दौरान अदालत में सवाल-जवाब का सिलसिला भी शुरू हुआ । निर्मोही अखाड़े के वकील ने कहा कि मुस्लिम कानून के तहत कोई भी व्यक्ति जमीन पर कब्जे की वैध अनुमति के बिना दूसरे की जमीन पर मस्जिद निर्माण नहीं कर सकता है ।  ऐसे में जबरन कब्जाई गई जमीन पर बनाई गई मस्जिद गैर इस्लामिक है और वहां पर अदा की गई नमाज कबूल नहीं होती है । चीफ जस्टिस ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में जज ने कहा है कि मस्जिद से पहले किसी तरह के ढांचे का कोई सबूत नहीं है । इस पर निर्मोही अखाड़े के वकील ने कहा कि अगर उन्होंने इसे ढहा दिया तो इसका मतलब ये नहीं है कि वहां पर कोई निर्माण नहीं था. चीफ जस्टिस ने इसके बाद कहा कि इसी मुद्दे के लिए ट्रायल होता है, आपको हमें सबूत दिखाना पड़ेगा ।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमारे सामने वहां के स्ट्रक्चर पर स्थिति को साफ करें । चीफ जस्टिस ने पूछा कि वहां पर एंट्री कहां से होती है? सीता रसोई से या फिर हनुमान द्वार से? इसके अलावा CJI ने पूछा कि निर्मोही अखाड़ा कैसे रजिस्टर किया हुआ? जस्टिस नज़ीर ने निर्मोही अखाड़े से पूछा कि आप बहस में सबसे पहले अपनी बात रख रहे हैं, आपको हमें इसकी पूरी जानकारी देनी चाहिए।

राम मंदिर मामले पर सुनवाई शुरू तो चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस बोबडे, जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर कोर्ट में पहुंचे । चीफ जस्टिस ने बहस शुरू होते ही कहा कि सबसे पहले स्टेटस और लोकस पर दलीलें रखी जाएं। इस पर निर्मोही अखाड़े की तरफ से सुशील कुमार जैन ने अपनी बात रखनी शुरू की । जैन ने आंतरिक कोर्ट यार्ड पर मालिकाना हक का दावा किया । उन्होंने कहा कि सैकड़ों वर्षों से इस जमीन और मन्दिर पर अखाड़े का ही अधिकार और कब्जा रहा है, इस अखाड़े के रजिस्ट्रेशन से भी पहले से ही है । निर्मोही अखाड़े की तरफ से कहा गया है कि सदियों पुराने रामलला की सेवा पूजा और मन्दिर प्रबंधन के अधिकार को छीन लिया गया है। 


निर्मोही अखाड़े ने अदालत को बताया कि 1961 में वक्फ बोर्ड ने इस पर दावा ठोका था , लेकिन हम ही वहां पर सदियों से पूजा करते आ रहे हैं, हमारे पुजारी ही प्रबंधन को संभाल रहे थे । सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़े ने कहा कि 6 दिसंबर, 1992 को कुछ शरारती तत्वों ने रामजन्मभूमि पर बना विवादित ढांचा ढहा दिया था । इतना ही नहीं निर्मोही अखाड़े ने अदालत से कहा कि हमसे पूजा का अधिकार छीना गया है । सुप्रीम कोर्ट ने बहस के दौरान निर्मोही अखाड़े से पूछा कि क्या कोर्टयार्ड के बाहर सीता रसोई है?

इसी क्रम में निर्मोही अखाड़े ने कहा कि 16 दिसंबर 1949  को आखिरी बार जन्मभूमि पर बनाई गई मस्जिद में नमाड पढ़ी गई थी, जिसके बाद 1961 में वक्फ बोर्ड ने अपना दावा दाखिल किया था। लेकिन इसी दौरान जब राजीव धवन ने कोर्ट को टोका तो CJI ने कहा कि आपको आपका समय मिलेगा, बीच में ना टोकें और कोर्ट की गरिमा का ध्यान रखें ।

वहीं इसके बाद निर्मोही अखाड़े के वकील ने सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से जो सबमिशन किया गया, उसे अदालत के सामने पढ़ा । निर्मोही अखाड़े की तरफ से इस मामले के इतिहास और बाबर शासन काल का जिक्र किया जा रहा है । 

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