Tuesday, October 20, 2020

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Bihar Assembly Election 2020 - चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन दागियों पर भारी , दर्अज मुकदमों को अखबार में छपवाना होगा

अंग्वाल संवाददाता
Bihar Assembly Election 2020 - चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन दागियों पर भारी , दर्अज मुकदमों को अखबार में छपवाना होगा

पटना । बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election 2020 ) की सुगबुगाहट तेज हो गई है । निर्वाचन आयोग के अफसर पिछले दिनों जिलों के जिलाधिकारियों और एसएसपी के साथ बैठक कर चुके हैं । एक बार फिर से आयोग के अफसर राज्य के दौरे पर आने वाले हैं । इस सबके बीच खबर है कि इस बार चुनाव आयोग ने दागी नेताओं के विधानसभा तक पहुंचने की राह को कठिन कर दिया है । चुनाव आयोग ने आपराधिक छवि के लोगों पर सख्ती के इरादे से नई गाइडलाइन जारी की है। अब प्रत्‍याशियों को अपने मुकदमों को जनता के समक्ष सार्वजनिक करना होगा।

बता दें कि चुनाव आयोग की गाइडलाइन में प्रावधान किया गया है कि दागी नेताओँ को अपने नामांकन पत्र में अपने अपराध संबंधी मुकदमों का पूरा ब्योरा देना होगा । इतना ही नहीं दागी नेताओं को नामांकन से पहले तीन बार अखबार में अपने ऊपर चल रहे मुकदमों की जानकारी अखबार में देनी होगी । विज्ञापन कब प्रकाशित करना है इसका निर्धारण चुनाव आयोग करेगा। अखबार में विज्ञापन प्रकाशित होने के अगले दिन संबंधित प्रत्याशी को उस अखबार की एक प्रति विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग अफसर को देनी होगी, जिसमें उसका विज्ञापन होगा।

राज्य के उप निर्वाचन पदाधिकारी बैजू नाथ कुमार सिंह ने बताया कि पूर्व में दागदार छवि वाले प्रत्याशियों को फॉर्म 26 के पारा पांच-छह में आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती थी। नई गाइडलाइन में यह व्यवस्था की गई है कि जिन प्रत्याशियों के खिलाफ मामले दर्ज हैं, उन्हें नामांकन के बाद नाम वापसी के चार दिनों के अंदर अपने ऊपर चल रहे या लंबित आपराधिक मामलों का पहला विज्ञापन विधानसभा क्षेत्र में प्रसारित अखबार में कराना होगा। दूसरी बार यही विज्ञापन नाम वापसी के पांचवे से आठवें दिन और तीसरी बार मतदान के ठीक एक दिन पहले समाचार पत्र में प्रकाशित कराना होगा। उन्होंने कहा कि आयोग का मानना है कि मतदाताओं को अपने प्रत्याशी के आपराधिक मामलों की जानकारी होगी तो वे सोच-समझकर मतदान करेंगे। साथ ही इस व्यवस्था के प्रभावी होने से सदन के अंदर साफ-सुथरी छवि वाले विजयी उम्मीदवार पहुंचेंगे। नई व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी होगी और मतदाताओं को उम्मीदवार के बारे में हर प्रकार की जानकारी मिल सकेगी।


बहरहाल , चुनाव आयोग की इस गाइडलाइन ने दागी नेताओँ के लिए मुश्किल बढ़ा दी है । अब मतदाताओं को पहले से पता होगा कि वह जिस उम्मीदवार को अपना वोट दे रहे हैं, उस पर कितने मुकदमे दर्ज हैं । वहीं इन दागी उम्मीदवारों का अपनी सच्चाई छिपाकर जनता के बीच जाना भी आसान नहीं होगा । अगर दागी नेता सारे मुकदमों का खुलासा करने के बाद जनता के बीच जाता है तो उसकी काफी किरकिरी होने की संभावना है , जबिक उसके द्वारा सभी मुकदमों की जानकारी अखबार में प्रकाशित नहीं करवाने पर उसका नामांकन रद्द होने का खतरा उस पर हमेशा मंडराता रहेगा । 

चुनाव आयोग ने यह गाइडलाइन इसलिए तैयार की है ताकि इससे स्वच्छ छवि के नेता मैदान में उतर सकें और लोग उन्हें अपना जनप्रतिनिधि बनाने के लिए मतदान करें । 

 

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