Tuesday, June 25, 2019

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महिला सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण है झारखंड का ये गांव, हर लड़की खेलती है हाॅकी 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
महिला सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण है झारखंड का ये गांव, हर लड़की खेलती है हाॅकी 

नई दिल्ली

आज सरकार की तरफ से महिला सशक्तिकरण के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सरकार की स्कीमों से महिलाओं को फायदा भी हो रहा है। अगर आपको महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण देखना है तो झारखंड के हेसेल गांव आइए। इस गांव की सबसे बड़ी खासियत ये है कि गरीबी और नक्सल प्रभावित होने के बावजूद यहां की लड़कियां हाॅकी खेलती हैं। वो भी एक-दो नहीं बल्कि गांव की हर लड़की।

यहां लोगों के पास भले ही रहने के लिए पक्के मकान न हों, खाने के लिए बहुत अच्छा भोजन न मिलता हो लेकिन देश के लिए खेलने का जज्बा कम नहीं है। इस गांव की निक्की प्रधान झारखंड की ऐसी पहली महिला खिलाड़ी हैं जिन्हें भारतीय हाॅकी टीम का हिस्सा बनने का मौका मिला और उन्होंने ओलंपिक में हिस्सा लिया। आज हेसेल गांव की लड़कियां निक्की को अपना आदर्श मानती हैं। 


इसी गांव की पुष्पा प्रधान भी साल 2004 में एशिया कप के दौरान गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थी। पुष्पा ने 2002 में जोहान्सबर्ग में हुए चैम्पियनंस ट्राॅफी के मैच में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था।  आपको बता दें कि झारखंड राज्य का हेसेल गांव नक्सल प्रभावित जिले खूंटी में पड़ता है। हेसा पंचायत के तहत पड़ने वाले इस गांव में करीब 70 घर हैं और इसमें साढ़े तीन सौ से ज्यादा लोग रहते हैं। यहां ज्यादातर घर आदिवासियों के हैं। इन परिवारों में से शायद ही कोई ऐसी लड़की होगी जिसने हाॅकी न खेली हो। एक स्थानीय निवासी के मुताबिक यहां लड़कियों को पढ़ाई-लिखाई शुरू करने से पहले हाॅकी पकड़ा दी जाती है। इस गांव की दर्जनों लड़कियों ने राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह बनाई है और 30 से 35 लड़कियों ने राज्य स्तरीय खेलों में हिस्सा लिया है।

पुष्पा प्रधान और निक्की प्रधान जैसी लड़कियों ने इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं के लिए जोहान्सबर्ग, रियो, सिंगापुर और बैंकाॅक जैसे देशों में अपनी हुनर का जलवा दिखाया है। देश के लिए खेलकर इन लड़कियों ने न सिर्फ झारखंड बल्कि देश का नाम भी रौशन किया। इन लड़कियों का हाॅकी के प्रति जज्बे का पता इसी से चलता है कि प्रैक्टिस के लिए खेल का मैदान न होने के बावजूद इस खेल को बड़ी ही दिलचस्पी के साथ खेलती हैं। जब इन लड़कियों से हाॅकी से इतना लगाव का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इन्हें देश के लिए खेलना है। हेसेल गांव की लड़कियां बेहतरीन हाॅकी खेलती हैं। यहां तक की ज्यादातर ने तो अपने पासपोर्ट इस उम्मीद में बनवा रखे हैं कि एक दिन उन्हें भी भारत के लिए खेलने का मौका मिलेगा। ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रही निक्की प्रधान ने बताया कि अभाव के चलते हेसेल गांव की लड़कियों ने अभाव में हाॅकी खेलना सीखा है। इस खेल ने हेसेल को राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी है। निक्की को उम्मीद है कि गांव की लड़कियां इस गांव की परंपरा को और आगे ले जाएंगी। 

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