Saturday, December 14, 2019

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जिस प्याज को हम 30 रुपये/किलो में खरीद रहे , मंडी में किसानों को उसके मिल रहे 2 रुपये , ऐसे में क्या करे अन्नदाता

अंग्वाल न्यूज डेस्क
जिस प्याज को हम 30 रुपये/किलो में खरीद रहे , मंडी में किसानों को उसके मिल रहे 2 रुपये , ऐसे में क्या करे अन्नदाता

भोपाल ।  केंद्र की मोदी सरकार भले ही देश में किसानों के लिए  बहुत कुछ किए जाने के दावे कर रही हो लेकिन हकीकत यही है कि असल किसानों के लिए अभी भी राहत में आटे में नमक बराबर ही है। आलम ये है कि ग्राहकों तक 25-30 रुपये प्रतिकिलो में पहुंचने वाला प्याज किसान 90 पैसे से 2 रुपये तक के बीच में बेचने को मजबूर है। जबकि सबसे बेहतर क्वालिटी के प्याज के लिए किसानों को मंडी में मात्र 4-5 रुपये ही मिल रहे हैं, जबकि लोगों तक यह 35-40 रुपये तक पहुंच रहा है। प्याज की सबसे बड़ी मंडी नीमच में है, जहां किसान अब इस प्याज को मंडी में ही फेंकने को मजबूर हैं क्योंकि मंडी में मिल रहे प्याज के दाम से उनका लागत और भाड़ा तक नहीं निकल रहा है। ऐसे में किसान या तो अपना प्याज जानवरों को खिला रहे हैं या मंडी में ही फेंक कर जा रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल लहसुन उगाने वाले किसानों का है, जो अपना माल 2 से 3 रुपये प्रतिकिलो बेचने को मजबूर हैं। 

लागत तक नहीं निकल रही

बता दें कि मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी प्याज मंडी में प्यार के दाम एकदम से धड़ाम होने के चलते इन दिनों किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन दिनों सबसे बड़ी प्याज मंडी नीमच में प्याज 90 पैसे से लेकर 2 रुपये प्रतिकिलो तक के बीच बेची जा रही है, जबकि ए क्लास प्याज 4 से 5 रुपये प्रतिकिलो के भाव से बिक रही है। लेकिन किसानों का कहना है कि जो भाव बाजार में मिल रहे हैं, उसमें तो उनकी लागत और मालभाड़ा के साथ मजदूरी तक नहीं निकल पा रही है। ऐसे में हम अपना माल मंडी में ही फेंकने को मजबूर हैं । 

मंडी के व्यापारियों पर लगाए आरोप


इस दौरान कुछ किसानों ने मंडी के कुछ व्यापारियों पर आरोप लगाया है कि वो आपस में साठगांठ करके जानबूझकर कम दाम लगा रहे हैं , जिसके चलते उन्हें मजबूरन अपना माल कम दाम पर बेचना ही पड़ता है, जबकि आम जनता तक हमारा प्याजा बेचे गए दाम से कई-कई गुना ज्यादा रेट पर पहुंच रहा है। इस सब के बीच कुछ लोग हैं, जो बीच में अपनी जेब गर्म कर रहे हैं लेकिन हम लोगों को अपनी लागत के साथ मालभाड़े और मजदूरी तक के पैसे नहीं मिल पाते। मुनाफा की तो बात बहुत दूर की है।ॉ

लहसुन के दाम से भी किसान परेशान

प्याज ही नहीं इस मंडी में लहसुन के दामों ने भी किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। मंडी में लहसुन के दाम 2 रुपये से 3 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से मिल रहे हैं, जबकि लहसुन उगाने की लागत और मालभाड़ा समेत मजदूरी को जोड़े तो वो इस मिल रहे दाम से ज्यादा होती है। इस सब के बीच किसानों का कहना है कि हमारी लहसुन उगाने की जो लागत है उससे काफी कम दाम हमें मंडी में मिल रहे हैं, ऐसे में कोई क्यों किसान बनकर मेहनत करना चाहेगा। 

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