Sunday, October 25, 2020

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शिवसेना ने राज्यसभा में खेला दांव , न हिन्दुत्व के मुद्दे से हटी न कांग्रेस को नाराज किया, लेकिन आगे फिर आएंगे ऐसे हालात

अंग्वाल न्यूज डेस्क
शिवसेना ने राज्यसभा में खेला दांव , न हिन्दुत्व के मुद्दे से हटी न कांग्रेस को नाराज किया, लेकिन आगे फिर आएंगे ऐसे हालात

नई दिल्ली । महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बाद शिवसेना खुद को सहज महसूस नहीं कर रही है । पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने ऐसे संकेत दिए कि जल्द एक बार फिर से भाजपा और शिवसेना साथ साथ नजर आ सकते हैं। हालांकि खुद शिवसेना के आलाकमान नेता भी इस तरह के ही संकेत दे रहे हैं । शिवसेना द्वारा लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन करने पर कांग्रेस ने नाराजगी जाहिर की थी , जिसके बाद शिवसेना का बयान आया था कि वह राज्यसभा में अपना रुख बदल सकती है । हालांकि इस दौरान शिवसेना ने ऐसा दांव खेला कि न तो CAB का राज्यसभा में विरोध करके वह अपने हिन्दुत्व के मुद्दे से ही अलग हुई न ही समर्थन करके अपने गठबंधन के साथियों को नाराज किया । शिवसेना ने राज्यसभा में वोटिंग के दौरान सदन से वॉकआउट किया , जिसके चलते उनके तीनों सांसदों ने वोटिंग नहीं की और इसके चलते बहुमत का आंकड़ा भी कम हो गया । हालांकि ऐसी स्थिति अभी आने वाले समय में शिवसेना को और झेलनी होगी , जब NRC के साथ ही कई अन्य मुद्दों पर ( जिनपर पहले शिवसेना भाजपा के सुर में सुर मिलाती थी और कांग्रेस -एनसीपी विरोध ) शिवसेना को अपना रुख साफ करना होगा।

असल में भाजपा को सत्ता से दूर करने के लिए बना महाराष्ट्र सरकार का गठबंधन , अब अपने कई फैसलों को लेकर उलझता नजर आ रहा है । असल मे एसीपी -कांग्रेस के साथ ही शिवसेना के बीच विचारधारा का अंदर है , जहां कांग्रेस अल्पसंख्यकों को लुभाने वाली पार्टी के रूप में जानी जाती है , वहीं शिवसेना कट्टर हिंदुत्व के मुद्दों को लेकर मुखर नजर आई है । अगर बात एनसीपी की करें तो भाजपा सरकार से उसका कई बार छत्तीस का आंकड़ा रहा है तो कुछ बार वह भाजपा की नीतियों पर सहमत भी नजर आई है । लेकिन ऐसे समय में जब महाराष्ट्र में तीनों दलों ने भाजपा को सत्ता से बेदखल करते हुए सत्ता पर अपना कब्जा किया हो, शिवसेना के लिए अन्य दोनों दलों के साथ बने रहना बड़ी चुनौती बन रही है । 


नागरिकता संशोधन बिल को लेकर शिवसेना भाजपा के साथ खड़ी नजर आई है , यहां तक की पूर्व में कई बयानों में कांग्रेसी नेताओं द्वारा भी इस पक्ष में बयान देते देखा गया है , लेकिन अब कांग्रेस इस बिल के विरोध में खड़ी है। ऐसे समय में जब शिवसेना को महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार चलानी है और CAB के मुद्दे पर गठबंधन के साथी दलों से अलग विचार रखना हो , वो भी हिन्दुत्व बनाम अल्पसंख्यक की बहस में , तो शिवसेना ने बीच का रास्ता चुना । न तो वह इस बिल के विरोध में खड़ी दिखी न ही कांग्रेस से अलग अपना स्टेंड लेते हुए । शिवसेना ने राज्यसभा में इस बिल को लेकर हो रही वोटिंग से वॉक आउट किया । 

बहरहाल , अभी शिवसेना सरकार को ऐसी कई और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है । केंद्र की मोदी सरकार पूरे देश में एनआरसी NRC को लागू करवाने का संकल्प ले चुकी है , लेकिन कांग्रेस समेत कई अन्य राजनीति दल इसके विरोध में खड़े हो रहे हैं। अब ऐसे समय में जब वह राज्य में खुद कांग्रेस सरकार के साथ सत्ता में हैं , वहीं दूसरी और उनकी विचारधारा उससे बिल्कुल अलग नजर आएगी । एनआरसी को लेकर कांग्रेस के कई नेता भी भाजपा की विचारधारा से सहमत हैं , लेकिन शिवसेना को इस मुद्दे पर भी अपना स्टेंड साफ करना होगा, जो महाराष्ट्र में मुद्दा बनेगा ।

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