Saturday, October 19, 2019

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सावधान : लाड़लों को स्मार्टफोन देकर आप रोक रहे हैं उनका शारीरिक - मानसिक विकास , WHO ने तय किया बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम

अंग्वाल न्यूज डेस्क
सावधान : लाड़लों को स्मार्टफोन देकर आप रोक रहे हैं उनका शारीरिक - मानसिक विकास , WHO ने तय किया बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम

नई दिल्ली  । अमूमन अपने बच्चों के रोने , किसी चीज की जिद करने या किसी मेहमान के आ जाने पर उसे अपना मोबाइल देकर या टीवी के आगे बैठाकर शांत करवाने वाले अभिभावक जल्द से जल्द अपनी इस आदत को बदल लें। अभी तक यह माना जाता था कि ज्यादा टीवी स्कीन या मोबाइल देखने से बच्चों की आंखों पर असर पड़ता है लेकिन WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की हाल में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके परिणाम बच्चों पर काफी घातक हैं। 5 साल से कम उम्र के बच्चों द्वारा ज्यादा देर तक टीवी या मोबाइल स्क्रीन देखने पर उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी प्रभावित होता है । ऐसे में WHO ने अभिभावकों से आह्वान किया है कि वह अपने बच्चों को मोबाइल फोन, टीवी स्क्रीन, लैपटॉप और अन्य इलैक्ट्रोनिक उपकरणों से दूर रखें ।

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कम दौड़ने भागने वाले बच्चों पर बुरा असर

असल में शहरों की जीवनशैली में जहां भाग-दौड़ कम हो रही है , वहीं कई अभिभावक अपने बच्चों को घरों और फ्लैट से बाहर नहीं जाने देते । वहीं खुद कुछ छोटे बच्चे टीवी-मोबाइल या कंप्यूटर देखने और उसपर खेलने के लालच में घरों से बाहर नहीं आते । कुछ माता पिता जहां बच्चों का घर से बाहर न निकलने को ही ठीक मानते हैं तो कुछ अपने बच्चों के बाहर जाने से मना करने पर उनकी मानकर उन्हें कंप्यूटर या टीवी पर गेम खेलने या कार्टून देखने देते हैं। कुछ अभिभावक तो अपने बच्चों को मोबाइल पकड़ा देते हैं । अब ऐसे में बच्चे को कितनी देर यह स्क्रीन देखनी चाहिए, इसके बारे में न तो बच्चों को पता है न अभिभावकों को, ऐसी स्थिति इन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है ।   

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WHO ने निर्धारित किया है बच्चों का स्कीन टाइम

असल में , विश्व स्वास्थ संगठन यानी WHO ने हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में 5 साल से कम उम्र के बच्चों का स्क्रीन टाइम निर्धारित कर दिया है । लोग अभी तक यही मानते थे कि ज्यादा टीवी मोबाइल देखने से बच्चों की आंखें खराब होती है , लेकिन 5 साल से कम उम्र के बच्चों का निर्धारित समय से ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके शारिरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर डालता है । ऐसे में WHO ने अभिभावक को बच्चों को मोबाइल फोन, टीवी स्क्रीन, लैपटॉप और अन्य इलैक्ट्रोनिक उपकरणों से दूर रखने के लिए कहा है ।


जानिए क्या है WHO की गाइडलाइन

1 साल से छोटे बच्चों के लिए  - बता दें कि एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 0 स्क्रीन टाइम निर्धारित किया गया है । इसका मतलब उन्हें स्क्रीन नहीं दिखानी चाहिए और न ही टीवी , कंप्यूटर या मोबाइल के सामने रखना चाहिए । ऐसे बच्चों को कुछ देर पेट के बल भी लिटाएं।

1 से 2 साल के बच्चों के लिए - इस आयुवर्ग के बच्चों के लिए एक दिन में स्क्रीन टाइम 1 घण्टे से ज्यादा न हो । ऐसे बच्चों को अपने साथ मैदान में ले जाएं और उनके साथ बैठकर उन्हें कहानियां सुनाएं ।

2-4 साल के बच्चे - इन आयुवर्ग के बच्चों के लिए भी दिनभर में कोई भी स्क्रीन देखने का ज्यादा से ज्यादा समय 1 घंटा तय किया गया है । लेकिन इन बच्चों की शारीरिक कसरत पर अभिभावकों को पूरा ध्यान देना चाहिए ।

4-5 साल के बच्चे - इन बच्चों के लिए भी समयसीमा ज्यादा से ज्यादा 1 घंटे रखी गई है , लेकिन बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए उन्हें घर से बाहर मैदान में ले जाकर उनके साथ खेलने या किसी एक्टिविटी में व्यस्त रखने की सलाह दी गई है ।

क्या कहते है चिकित्सक

ऐसी स्थिति पर मेट्रो अस्पताल समूह के डॉ. दिनेश समुझ का कहना कि मौजूदा जीवनशैली छोटे बच्चों कें लिए चिंताजनक बनी हुई है । आजकल कई परिजन जहां बच्चों को घरों से बाहर खेलने नहीं भेजते , वहीं कई बच्चे खुद बाहर नहीं निकलते । अगर बात छोटे बच्चों की करें तो मौजूद दौर में उनका टीवी-मोबाइल की ओर आकर्षण सही में आने वाले समय में बड़ी परेशानी की शुरुआत है । अमूमन देखने में आ रहा है कि ऐसे बच्चे जहां मोटापे का शिकार हो रहे हैं, वहीं ऐसे बच्चों का स्वभाव आक्रामक हो रहा है । वह अपनी बात नहीं माने जाने पर या तो जोर जोर से चिल्लाते हैं या रोने लगते हैं । 5 साल तक के बच्चों में अमूमन देखा गया है कि ऐसे कई बच्चे टीवी पर कार्टून देखकर उनकी तरह ही बात करना शुरू कर देते हैं। बच्चों का टीवी मोबाइल की स्क्रीन को ज्यादा समय तक देखना उनके मानसिक विकास के साथ शारीरिक विकास मे भी बाधा उत्पन्न करता है । ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों के साथ समय बिताएं, उनके साथ खेले और उन्हें कहानियां -कविताएं सुनाएं ।

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